मादा मच्छर एनाफिलीज के काटने से फैलने वाले मलेरिया के रोगी ऊधमसिंह नगर में कम तो नैनीताल में अधिक हैं। विभाग मिलने वाले बजट से प्रचार-प्रसार कर लोगों को सिर्फ जागरूक करने तक सीमित रहता है। मलेरिया का प्रकोप जुलाई से सितंबर तक रहता है। बारिश के बाद मादा मच्छर एलाफिलीज की ब्रीडिंग (पैदावार) तेजी से होती है।
उत्तराखंड बनने से पहले मलेरिया के रोगियों की संख्या चार से पांच हजार तक रहती थी। राज्य बनने के बाद मलेरिया के रोगियों में कमी आई है। खास बात ये है कि ऊधमसिंह नगर में वर्ष 2011 में मलेरिया रोगियों की संख्या 218 और नैनीताल में 109 थी मगर वर्ष 2015 में ऊधमसिंह नगर में संख्या घटकर 132 रह गई और नैनीताल में संख्या बढ़कर 202 पहुुंच गई। जिला मलेरिया अधिकारी अर्जुन सिंह राणा की मानें तो सुशीला तिवारी अस्पताल में उत्तर प्रदेश के मरीज भी आते हैं।
जिसके चलते नैनीताल में मलेरिया रोगियों की संख्या अधिक है। मलेरिया से बचाव के लिए आप अपने घर के पास पानी न एकत्र होने दें। मलेरिया का मच्छर जुलाई से सितंबर तक तेजी से पनपता है और ये मादा मच्छर एलाफिलीज के काटने से फैलता है। राणा ने बताया कि मलेरिया की रोकथाम को 50 हजार रुपये मिले हैं। उक्त राशि से पंपलेट, फ्लेक्सी बनवाई गई है साथ ही प्रचार-प्रसार कराया जाएगा।
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वर्ष ऊधमसिंह नगर नैनीताल (मलेरिया रोगियों की संख्या)
2011 218 109
2012 150 220
2013 160 96
2014 403 92
2015 132 202