कुमाऊं में पेट्रोलियम पदार्थों का संकट फिलहाल जून आखिर तक खत्म होने वाला नहीं है। मंगलवार दोपहर मथुरा से लालकुआं डिपो में ईंधन पहुंचने से कुछ राहत जरूर मिली। डिपो में रैक पहुंचते ही कुमाऊं में ड्राई हो चुके पेट्रोल पंपों के लिए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति दी गई। इससे पंपों में चार दिनों तक पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता रहेगी। इसके बाद ग्राहकों को फिर संकट झेलना पड़ेगा।
आईओसी का लालकुआं में डिपो है। मथुरा और पानीपत से पेट्रोलियम पदार्थ आता है। बीपीसी की आपूर्ति तो सामान्य है लेकिन आईओसी में संकट होने से बीपीसी के पंपों में भी दबाव बढ़ गया है, जबकि एचपीसी के पंपों के लिए आईओसी से ही ईंधन की आपूर्ति होती है। कुमाऊं में आईओसी के सर्वाधिक पंप हैं। आईओसी की आपूर्र्ति लड़खड़ाने से पूरे कुमाऊं में ग्राहकों को पेट्रोल और डीजल का संकट झेलना पड़ रहा है।
मंगलवार दोपहर कई दिनों बाद आईओसी के लालकुआं डिपो में ईंधन का रैक पहुंचा। इसमें 2200 केएल डीजल और 900 केएल पेट्रोल था। डिपो में ईंधन पहुंचते ही मंडल के लिए दो हजार केएल डीजल और सात सौ केएल पेट्रोल की आपूर्ति कुमाऊं के सभी जिलों को कर दी गई, इसमें नैनीताल जिले को 250 केएल पेट्रोल और 130 केएल डीजल मिला है। नैनीताल जिले के कई पंपों में डीजल की उपलब्धता है।
कुमाऊं में इसलिए है पेट्रोलियम पदार्थों का संकट
हल्द्वानी। कुमाऊं में इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) का सबसे बड़ा मार्केट
है। आईओसी का लालकुआं में डिपो है। डिपो में पेट्रोल-डीजल मथुरा और पानीपत
से आता है। एक अप्रैल 2015 से भारत सरकार ने उत्तराखंड में प्रदूषण का स्तर
कम करने के लिए यूरो-4 वर्जन के पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति अनिवार्य कर
दी है, जबकि इससे पहले यूरो-थ्री के पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति होती
थी। पानीपत से कुमाऊं के लिए यूरो-4 क्वालिटी का पेट्रोलियम पदार्थ नहीं
मिल पा रहा है। मथुरा से ही यूरो-4 क्वालिटी के पेट्रोलियम पदार्थ की
अल्टरनेट आपूर्ति हो रही है। मथुरा से पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति की
पहली प्राथमिकता उत्तरप्रदेश के लिए है। इसीलिए उत्तराखंड के कुमाऊं में
पेट्रोलियम पदार्थों का संकट खड़ा हो गया है। गढ़वाल में रुड़की डिपो तक
पानीपत से पाइप लाइन के जरिए यूरो-4 क्वालिटी के पेट्रोलियम पदार्थों की
आपूर्ति नियमित हो रही है, जिससे वहां संकट नहीं है।
नैनीताल जिले में पंपों की स्थिति
एचपीसी 15
आईओसी 22
बीपीसी 19
नैनीताल जिले में प्रतिदिन औसतन ईंधन की खपत
पेट्रोल 50 केएल
डीजल 133 केएल
एसडीएम और डीएसओ के निर्देश पर जारी होगा रिजर्व कोटा
पेट्रोलियम पदार्थों के संकट को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक रावत ने पेट्रोल पंप संचालकों के लिए रिजर्व में ईंधन सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक हर पेट्रोल पंप संचालक को 2000 लीटर डीजल और 1000 लीटर पेट्रोल रिजर्व रखना अनिवार्य होगा। रिजर्व कोटे का वितरण संबंधित एसडीएम और डीएसओ के आदेश पर होगा।
गैलन और ड्रम में ईंधन देने वाले का पंप लाइसेंस होगा निलंबन
मारामारी होने से ग्राहक अपने वाहनों के अलावा ड्रम और गैलन में पेट्रोल-डीजल भरवाकर सुरक्षित कर रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की मार्केटिंग गाइड लाइन के मुताबिक पेट्रोल को वाहनों के अलावा किसी भी बर्तन में देना अपराध है। इस अपराध के लिए पंपों का लाइसेंस 15 दिन के लिए निलंबित हो सकता है। डीएसओ तेजबल सिंह के मुताबिक पंपों में इसकी चेकिंग की जाएगी। ड्रम और गैलन में ईंधन देने वाले पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।