ग्रह-नक्षत्रों के गूढ़ रहस्यों को समझने की ललक यूपी-उत्तराखंड के युवाओं में सबसे अधिक दिखाई दे रही है। उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी (यूओयू) का ज्योतिष विभाग युवाओं की खास पसंद बन रहा है। यहां ग्रहों की चाल, गोचर और दशा का अध्ययन नए आयाम छू रहा है। यूओयू का ज्योतिष विभाग केवल शिक्षा के केंद्र के साथ प्राचीन विद्या और नई सोच का संगम बनकर उभर रहा है। यहां पढ़ाई केवल फलित ज्योतिष तक सीमित नहीं है। इसमें वैदिक कर्मकांड, वास्तुशास्त्र और चिकित्सा ज्योतिष जैसे पारंपरिक विषयों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ा गया है।
पढ़ाई के दाैरान छात्र न केवल ग्रहदशा, गोचर, नक्षत्रों की गति, संहिता और कुंडली बनाना सीखते हैं बल्कि पूजा-पाठ और यज्ञ-विधानों की पारंपरिक बारीकियों को भी आत्मसात कर रहे हैं। वैदिक कर्मकांड में शांति यज्ञ, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन और नवरात्र स्थापना जैसे संस्कारिक विधानों का विस्तार से अध्ययन कराया जा रहा है।
यूओयू के ज्योतिष पाठ्यक्रमों में इस समय 22 राज्यों के 800 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इसमें सबसे ज्यादा छात्र उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से हैं। इसके अलावा बिहार, झारखंड और बंगाल के युवा भी बराबर रुचि दिखा रहे हैं। ज्योतिष में एमए की पढ़ाई के दौरान सिद्धांत, संहिता और फलित तीनों का अध्ययन छात्र करते हैं। वर्तमान में दूरस्थ शिक्षा से 100 छात्र एम ज्योतिष की पढ़ाई कर रहे हैं।
देशभर के छात्र कर रहे अध्ययन
राज्य छात्र संख्या
उत्तराखंड 140
उत्तर प्रदेश 160
बिहार 60
झारखंड 50
पश्चिम बंगाल 55
मध्य प्रदेश/राजस्थान 50-55
महाराष्ट्र, केरल 40-50
अन्य 12 राज्य 10-25 (प्रत्येक)
तीन स्तर के पाठ्यक्रम
यहां एक वर्षीय डिप्लोमा, छह माह का सर्टिफिकेट और दो साल यानी चार सेमेस्टर का डिग्री कोर्स भी है। दो तरह की पढ़ाई है। पहला वैदिक जिसमें सृष्टि विज्ञान के प्रमाण पत्र और दूसरा वैदिक कांड का प्रमाणपत्र शामिल है। ज्याेतिष की पढ़ाई में छात्र फलित ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, चिकित्सा ज्योतिष और वैदिक कर्मकांड पढ़ रहे हैं। वैदिक कर्मकांड में धर्म शिक्षा भी शामिल है।
पीएचडी में तीन अवार्ड हो चुके हैं। एक छात्र का प्रवेश भी होने वाला है। वर्तमान में 22 राज्यों के 800 से ज्यादा छात्र यहां अध्ययन कर रहे हैं। 2017-2018 में ज्योतिष को विषय के रूप में शामिल करने वाला पहला मुक्त विश्वविद्यालय यूओयू है। बाद में एक अन्य मुक्त विवि ने यह कोर्स संचालित किया। -प्रो. डॉ. नंदन कुमार तिवारी, अध्यक्ष, ज्योतिष विभाग, यूओयू