उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को कार्य उपलब्ध होने के बाद भी विश्वविद्यालय द्वारा नियमित नही किए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद याचिका को निस्तारित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओ की ओर से एक जून 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन को सहानुभूति पूर्वक विधि अनुसार आठ सप्ताह के भीतर पुनर्विचार कर निस्तारित करें। कोर्ट ने कहा है कि उनकी सेवाएं इस आधार पर समाप्त न की जाए कि उन्होंने नियमतिकरण के लिए कोर्ट की शरण ली है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार बृजेश कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे 2007 से 2013 तक गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय मे दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों के रूप मे कार्यरत हैं। लेकिन उनको नियमित नहीं किया जा रहा है। याचिका में कहा कि उन्होनें नियमित करने के लिए एक जून 2026 को विश्वविद्यालय को प्रत्यावेदन दिया गया। लेकिन 15 जून 2026 को उसे बिना कारण बताए खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उनको नियमित करने के आदेश विश्वविद्यालय प्रशासन को दिए जाए।