देखा एक ख्वाब तो यह सिलसिले हुए, दूर तक निगाहों में गुल खिले हुए। फिल्म सिलसिले का यह गीत और इसमें फिल्माए गए ट्यूलिप गार्डन की खूबसूरती दोनों बेमिसाल रही है। अब ट्यूलिप गार्डन का यह ख्वाब गौलापार में भी सच होगा। ट्यूलिप गार्डन के ख्वाब को पूरा करने के लिए वन विभाग करीब तक पहुंच गया है।
प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के बायो डायवर्सिटी पार्क में ट्यूलिप गार्डन बनाने के लिए वन महकमे ने नीदरलैंड से हजारों की संख्या में बल्ब (एक तरह से पौधे) मंगाये हैं, इन्हें वन विभाग की नर्सरी में तैयार किया जा रहा है। संभावना है कि 15 मार्च तक जब फूल खिलेंगे, तो प्रकृतिक की शानदार खूबसूरती को लोग बस एक टक देखते ही रह जायेंगे।
अभी तक देश में ट्यूलिप गार्डन जम्मू-कश्मीर आदि जगहों पर हैं। जहां बड़ी संख्या में लोग इनकी खूबसूरती निहारने के लिए जाते हैं। वन विभाग ने भी ऐसा ही ट्यूलिप गार्डन विकसित करने की योजना बनाई है। 90 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनने वाले बायो डायवर्सिटी पार्क में करीब एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में यह गार्डन बनाने की प्रारंभिक योजना है।
इसकी गुणवत्ता और योजना में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए नीदरलैंड से पौधे मंगाये गए हैं। यही नहीं बाकायदा वन विभाग की टीम भी नीदरलैंड में इन पार्कों का अध्ययन के लिये गई थी। डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि नीदरलैंड से ट्रीटेड (विशेष विधि से भेजे गए) हजारों पौधे पहुंच गए हैं।
इनको वन विभाग की नर्सरी में रखा गया है। जल्द ही इन्हें ट्यूलिप गार्डन में रोपित कर दिया जाएगा। 40 दिन में इनमें फूल आ जाना चाहिए। संभावना है कि पंद्रह मार्च तक हजारों फूल खिल जायेंगे। इसके अलावा बंगाल से बड़ी संख्या में खजूर के पौधे भी मंगाये गए हैं।
अगर कोई बड़ी तकनीकी अड़चन नहीं आई तो 15 मार्च तक ट्यूलिप गार्डन तैयार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। गार्डन तैयार होने के बाद वन विभाग ने होली के बाद यहां पर फ्लावर शो का आयोजन करने की योजना बनाई है।
जो प्रस्तावित जू का पहला और बड़ा लांचिंग कार्यक्रम होगा। इसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी को बाहर से बुलाने की भी योजना बनाई गई है। फ्लावर शो एक नये तरह का अनुभव लोगों को मिलेगा।