सीमा पर बाघों के शिकारी और वन्यजीव अंग के तस्कर सक्रिय हैं। वनाधिकारियों के अनुसार शिकार के लिए तोताराम गैंग और महेंद्र दुग्ताल फिराक में हैं। इस गैंग के सदस्यों को पकड़ने के लिए टीमों को लगाया गया है।
बार्डर पर टनकपुर इलाके, सुरई, खटीमा और यूपी के पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर शिकारियों की नजर रहती है। यहां से बाघ मारने के बाद नेपाल होते हुए उसकी खाल ठिकाने लगाने और सुरक्षा एजेंसियों का दबाव बढ़ने पर भागने का मौका होता है। वनाधिकारियों के अनुसार बीते सालों में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में करीब 11 बाघों को शिकारियों ने मार गिराया है।
उनकी निगाह उत्तराखंड के सीमा से सटे जंगलों की तरफ भी है। अक्टूबर-2010 में यह गैंग एक बार टनकपुर के पास बाघिन का शिकार कर भी चुका है। हालांकि उसमें एक केवल एक खाल बरामद हुई थी, पर चर्चा उड़ी थी कि जो शिकारी पकड़ा गया था उसने कई और बाघों को मारने की बात स्वीकारी थी। पर उसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी।
अब एक बार फिर महेंद्र दुग्ताल, रामचंदर और तोताराम शिकार की फिराक में हैं। नंधौर अभ्यारण्य के उप निदेशक प्रकाश आर्य कहते हैं कि रामचंदर और तोतराम रिश्तेदार भी हैं। तोताराम और रामचंदर का काम बाघ का शिकार करना है, धारचूला का रहने वाले महेंद्र दुग्ताल का काम खालों को नेपाल के रास्ते ठिकाने लगाना है। महेंद्र इस खेल का बड़ा खिलाड़ी है।
तोताराम नेपाल में रहता और कभी कभार टनकपुर इलाके में घुसता है। रामचंदर का घर भी इसी इलाके में बताया जाता है। बहरहाल, इस तिकड़ी के मंसूबे को विफल करने के साथ फरार अपराधियों की धरपकड़ को टीमों को लगाया गया है।