जवाहर नगर में आयोजित कौमी एकता मुशायरा और कवि सम्मेलन में जमील खैराबादी, अना देहलवी, काविश रुहेलवी, मोहन मुंतजिर समेत नामचीन शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी। शायरों नेे कौमी एकता और देशप्रेम का संदेश दिया। कार्यक्रम में दिल्ली, मध्य प्रदेश, कानपुर, अमरोहा और पंतनगर के शायर और कवि पहुंचे थे। अपने पसंदीदा शायरों को सुनने के लिए लोग भौर तक जुटे रहे।
शनिवार की रात जलील खैराबादी ने नातिया कलाम पेश कर मुशायरे का आगाज किया। काविश रुहेलवी ने ‘गला कटा के तिरंगा जो फहरा गए ऊंचा, जियालो को तनकर सलाम करते हैं, जो अपनी देश की मिट्टी के काम ना आ सके, हम ऐसे खून को काविश हराम कहते हैं।’सुनाकर खुब तालियों बटोरी। मोहन मुंतजिर ने ‘हम चाहते ही नहीं, मोहब्बत हो जाए’ सुनाकर महफिल को उरूज पर पहुंचा दिया। इसकी युवाओं में काफी धूम रही।
दिल्ली से आईं अना देहलवी ने जब माइक संभाला तो महफिल जवां हो उठी। उन्होंने ‘कागज पे सजाएंगे सजाने वाले, सोचना छोड़ दें उर्दू को मिटाने वाले, ए अना कौन मिटा सकता है तहजीब-ओ-गजल, जब तक जिंदा हैं गालिब के घराने वाले’ सुनाकर माहौल को खुशनुमा कर दिया। अध्यक्षता कर रहे जमील खैराबादी को लोगों ने बहुत संजीदगी से सुना। उन्होंने कहा ‘बहुत बुलंद फिजां में तेरी पतंग सही, मगर ये सोच अभी डोर किसके हाथ में है।
इधर की बात भला कैसे उस तरफ पहुंची, जरूर कोई मुनाफिक हमारे साथ में है।’ मुशायरे का संचालन मोइन शादाब ने कुछ इस तरह किया, ‘उदास झीलों में महताब डाल देता है, वो मेरी आंखों में कुछ ख्वाब डाल देता है। इनके अलावा मोहम्मद यूसुफ, हेमंत पांडे, महेंद्र शर्मा, पंकज फांकर, गोपाल दास नीरज आदि ने भी अपने कलाम पेश किया। इससे पूर्व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडी समिति के अध्यक्ष सुमित हृदयेश और विशिष्ट अतिथि सुहेल सिद्दीकी (दर्जा राज्य मंत्री) ने शमा रोशन की। कार्यक्रम का आयोजन सलमान सिद्दीकी और मुशीर नवाब ने किया था।