नवंबर से फरवरी होता है जिसमें उनका व्यवहार आक्रामक तक बाघों का मेटिंग (प्रजनन) सीजन हो जाता है। प्रजनन काल के दौरान वह अपने इलाके में दूसरे बाघ की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करता। यह संवेदनशील दौर होता है। नवंबर 2023 से अब तक 14 लोग बाघ के शिकार बन चुके हैं।
हर साल इसी अवधि में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं जिनमें कई बार ग्रामीणों को जान तक गंवानी पड़ती है। खतरे को देखते हुए कॉर्बेट प्रशासन ने जंगल से सटे गांवों में बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से जंगल में प्रवेश न करने की सख्त हिदायत दी जा रही है। विभागीय कर्मचारियों की ओर से मुनादी कर लोगों को सतर्क और सावधान रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
वन्यजीव प्रेमी संजय छिमवाल ने बताया कि बाघ स्वभाव से अकेले रहने वाला प्राणी है। प्रजनन काल के दौरान वह अपने इलाके में दूसरे बाघ की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करता जिससे उसका व्यवहार और आक्रामक हो जाता है। वहीं, मादा बाघिन अपने शावकों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक उग्र रहती है।
सीटीआर निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि बाघ को ट्रैंकुलाइज करने लिए मौके पर पिंजरे लगाए जा रहे है। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप और ड्रोन के माध्यम से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
यह समय टाइगर का ब्रिडिंग सीजन है। इस दौरान वह आक्रामक होते हैं। फिर भी विभाग प्रभावितों को आर्थिक मदद और मुआवजा दे रहा है। रामनगर की घटना में टाइगर को ट्रेंकुलाइज करने के निर्देश दे दिए गए हैं। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है, तभी मानव- वन्य जीव संघर्ष रुकेंगे।
- रंजन कुमार मिश्रा, पीसीसीएफ (हाफ)