हल्द्वानी। शरीर में शुगर की मात्रा आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। चिकित्सकों के अनुसार इसके बढ़ने से डायबिटिक रेटिनोपैथी नामक बीमारी होती हैं जो रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के नेत्र रोग की ओपीडी में हफ्ते भर में 20-25 मरीज शिकायत लेकर आ रहे हैं।
नेत्र रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतीक कौल ने बताया कि मधुमेह के लंबे समय तक रहने और इस पर नियंत्रण न होने पर बीमारी के बढ़ने का खतरा बना रहता है। शुगर का स्तर लगातार अनियंत्रित होने से यह बीमारी हो सकती है। शुरुआत के दो स्टेजों में अच्छी जीवनशैली अपनाकर इसे ठीक किया जा सकता है। समय पर इलाज नहीं होने पर आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है।
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डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण
- दृष्टि में धब्बे या काले धागे तैरते रहते हैं
- रात में देखने में कठिनाई होती है
- आसानी से रंगों की पहचान में दिक्कत होती है
- चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव आता है
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बचाव के उपाय
- दृष्टि में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें
- अपने रक्त शर्करा स्तर की निगरानी करें
- रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखें
- नियमित व्यायाम करने की आदत डालें
कोट-
रेटिना में खून के जामा होने से डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी होती है। आंखों का सही समय पर उपचार नहीं होने पर व्यक्ति अपने आंखों की रोशनी को खो बैठता हैं। - डॉ. प्रतीक कौल, असिस्टेंट प्रोफेसर, नेत्र रोग विभाग एसटीएच
29एचएलडी11- डॉ. प्रतीक कौल, असिस्टेंट प्रोफेसर, नेत्र रोग विभाग एसटीएच