विजयपुर तक पहुंची चुनाव बहिष्कार की चिंगारी
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लालकुआं विधानसभा में चुनाव बहिष्कार की चिंगारी सोमवार को गौलापार के विजयपुर गांव तक पहुंच गई। विजयपुर आखिरी छोर का गांव है। गांव को जोड़ने के लिए सूखी नदी पर पुल और पक्की सड़क नहीं बनने से आक्रोशित ग्रामीणों ने 2017 विधानसभा चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है।
गौलापार क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ उपजे आक्रोश से प्रत्याशियों में खलबली मची है। प्रत्याशी इन गांवों में जनसंपर्क में जाने के लिए कतरा रहे हैं।
गौलापार क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायत विकास की दौड़ में उपेक्षित हैं। सुल्तान नगरी के ग्रामीणों के बाद सोमवार को विजयपुर के ग्रामीणों ने भी चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया। देश की आजादी के सात दशक और उत्तराखंड राज्य गठन के 16 साल बाद भी विजयपुर गांव को जोड़ने वाले मार्ग पर सूखी नदी में पुल नहीं बन सका है।
गांव तक कच्ची सड़क बनी है। बारिश में सूखी नदी उफनाने से गांव का आवागमन टूट जाता है। बच्चे हफ्तों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। हर चुनाव में सूखी नदी पर पुल और गांव तक पक्का मोटर मार्ग का मुद्दा उठता है। विधायक बनने के बाद नेता आश्वासन भूल जाते हैं।
राजस्व गांव विजयपुर की जनता ने वोट के अधिकार को अपना हथियार बना लिया है। ग्रामीणों ने कहा कि विकास नहीं तो वोट नहीं देंगे। देवला तल्ला और विजयपुर के ग्रामीणों की संयुक्त पंचायत में पूर्व ब्लाक प्रमुख संध्या डालाकोटी और किरण डालाकोटी ने कहा कि क्षेत्र की जनता का किसी भी प्रत्याशी और पार्टी से विरोध नहीं है। जनता सिर्फ विकास चाहती है। पंचायत में 150 से अधिक ग्रामीण मौजूद थे।