हल्द्वानी। जाम की दिक्कत ऐसी बड़ी समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। असल दिक्कत सिस्टम में इच्छा शक्ति की कमी है। जिम्मेदार अफसरों ने इसे कभी गंभीरता से लिया ही नहीं। पुलिस की सोच रूट डायवर्जन से आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में जो सफर मात्र एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो सकता था वीकेंड पर उसमें पांच से आठ घंटे लग रहे हैं। इस समस्या से बाबा के भक्त, सैलानी, स्थानीय लोग और कारोबारी सभी त्रस्त हैं। सिस्टम की अलमारियों में कैद फाइलों में ही इसका समाधान है लेकिन फाइलें अलमारी और मेज के बीच ही घूमती रहती हैं जिसके चलते अब यह जाम समस्या से कहीं आगे बढ़कर नासूर बन चुका है।
यहां है समस्या का समाधान
रिंग रोड : नौ साल बाद फिर सर्वे की लाइन
हल्द्वानी रिंग रोड की घोषणा 22 अप्रैल 2017 को हुई थी। शुरुआती प्रस्ताव 50.43 किमी का था और लागत करीब 400 करोड़ रुपये बताई गई थी। बाद में जमीन, वन क्षेत्र और बढ़ती लागत के कारण योजना बार-बार बदली। आबादी और निजी जमीन के विरोध के बाद नया विकल्प भाखड़ा पुल से फायर लाइन होते हुए बेलबाबा के पास रामपुर रोड तक करीब 18.79 किमी का तैयार किया गया। फरवरी 2026 में सर्वे और डीपीआर के लिए 26.35 लाख रुपये जारी हुए। टेंडर भी खुला लेकिन सर्वे शुरू होने के कुछ ही समय बाद आरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति पहुंचने पर वन विभाग ने टीम को रोक दिया। तब से काम रुका हुआ है। यानी नौ साल पुरानी परियोजना अभी उस जगह खड़ी है जहां कागज पर रास्ता तय हो रहा है, जमीन पर सड़क नहीं।
काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास: पांच साल वन में, अब अदालत में
गुलाबघाटी के जाम का दबाव घटाने के लिए काठगोदाम गौला पुल से दानीजाला-सिमलखेत होते हुए एचएमटी अमृतपुर तक 3.5 किमी टू-लेन बाईपास प्रस्तावित है। 2019 में इसकी योजना सामने आई थी और बाद में वन भूमि व क्षतिपूरक वनीकरण को लेकर प्रक्रिया अटकती रही। 2026 में 18.22 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद परियोजना फिर निर्माण चरण में पहुंची। अब गौला पर 75 मीटर के पुल का काम शुरू हो चुका है। लेकिन पहाड़ी कटान वाला हिस्सा हाईकोर्ट में लंबित मामले के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा। लोनिवि का कहना है कि जहां कानूनी अड़चन नहीं है, वहां काम जारी रहेगा। अभी गौलापार से नैनीताल-भीमताल जाने के लिए नरीमन तिराहा, गुलाबघाटी, रानीबाग होकर जाना पड़ता है, जहां वीकेंड पर तीन-तीन घंटे जाम लगता है। इसके बनने से गौलापार से भीमताल रूट के वाहन सीधे अमृतपुर पहुंच जाते और गुलाबघाटी में जाम नहीं लगता।
सैनिटोरियम-रातीघाट : राहत का रास्ता बना मगर पूरी तरह खुल नहीं पाया
कैंची धाम के जाम से निजात दिलाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सैनिटोरियम-रातीघाट बाईपास का निर्माण कार्य किया था। विभाग की ओर से 19 किमी बाईपास का निर्माण कार्य पूरा करने के साथ नौ किमी से अधिक मार्ग पर डामरीकरण पूरा कर लिया है लेकिन 10 किमी मार्ग दूनीखाल से रातीघाट तक सड़क कच्ची ही है। इसके बावजूद विभाग ने 12 जून को इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुचारु करा दी थी लेकिन बरसात के दौरान सड़क पर जगह-जगह मलबा आने से वाहनों की आवाजाही बंद पड़ी है। इसके चलते अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रानीखेत, धारचूला, बागेश्वर और हल्द्वानी की ओर आने और जाने वाले यात्रियों और सैलानियों को कैंची धाम मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है।
नौकुचियाताल बाईपास : भीमताल के लिए राहत की एक और कड़ी
नौकुचियाताल से खड़की-खैरोला होते हुए सलेड़ी से जुड़ने वाले मार्ग को जाम घटाने वाली एक अन्य कड़ी के रूप में आगे बढ़ाया गया है। लोक निर्माण विभाग नौकुचियाताल से खड़की-खैरोला बाईपास का निर्माण कार्य कर रहा है। पहले चरण में पांच किमी, दूसरे चरण में तीन और तीसरे चरण में दो किमी बाईपास का निर्माण किया जाना है। नौकुचियाताल बाईपास बनने से अगले साल तक सैलानियों और यात्रियों को भीमताल, सलड़ी, रानीबाग और काठगोदाम में जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जाम का इलाज, कौन कहां अटका?
परियोजना अभी की स्थिति अड़चन
हल्द्वानी रिंग रोड नया अलाइनमेंट, सर्वे/डीपीआर चरण : वन अनुमति, जमीन, डीपीआर
काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास पुल का निर्माण जारी : पहाड़ी कटान वाला हिस्सा न्यायालय में
सेनिटोरियम-रातीघाट बाईपास करीब 11 किमी डामरीकरण: लगभग 8 किमी हिस्सा अधूरा/बंद
नौकुचियाताल बाईपास निर्माण शुरू : परियोजना पूरी होने का इंतजार
दूनीखाल से रातीघाट तक 10 किमी सड़क के कच्चे भाग में बीते दिनों आए मलबे को हटाने के लिए तीन जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। सड़क पर आए मलबे को हटाने के साथ रविवार से छोटे वाहनों के लिए सड़क सुचारु कर दी जाएगी। शासन को 10 किमी सड़क में डामरीकरण के लिए 21 करोड़ का प्रस्ताव भेजा हैं। धनराशि स्वीकृत होने के बाद का डामरीकरण का काम शुरु किया जाएगा। -रत्नेश सक्सेना, अधिशासी अभियंता, लोनिवि