समीपवर्ती गांव सरियाताल निवासी कुमाऊं रेजीमेंट के जवान भूपेंद्र सिंह जीना (24) की नरोला रेलवे स्टेशन पर दुर्घटना में मौत हो गई। भूपेंद्र परिवार का इकलौता पुत्र था और फौज से छुट्टी लेकर घर आ रहा था।
दुर्घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। शव के पहुंचने के बाद शुक्रवार को रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट में सैनिक की सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। 6-कुमाऊं रेजीमेंट में वर्ष 2013 में भर्ती भूपेंद्र वर्तमान में जम्मू कश्मीर में तैनात थे और छुट्टी लेकर घर लौट रहे थे।
31 अगस्त की सुबह सात बजे नरोला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की खिड़की से बाहर झांकने के दौरान उनका सिर पोल से टकरा गया और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। जेब में मिले परिचय पत्र के आधार पर उनकी शिनाख्त हुई। जीआरपी ने उनकी रेजीमेंट के उच्चाधिकारियों और परिजनों को घटना की जानकारी दी।
बीती रात नायब सूबेदार रमेश चंद्र जोशी और सेना के अन्य जवान भूपेंद्र का शव लेकर उनके घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। पिता नंदन सिंह जीना, माता कमला जीना समेत अन्य परिजनों के आंसू नहीं थम रहे थे। भूपेंद्र की अचानक हुई मौत से समूचा क्षेत्र गमगीन हो गया। भूपेंद्र की तीन विवाहित बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
शुक्रवार को रानीबाग चित्रशिला घाट पर जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर बीएस रौतेला व रमेश चंद्र जोशी आदि ने पुष्प चक्र अर्पित किए, जबकि जवानों ने शस्त्र उल्टे कर अंतिम सलामी दी। संसदीय सचिव सरिता आर्या, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री जया बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य डा.हरीश बिष्ट, ब्लाक प्रमुख गीता बिष्ट, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हेम आर्या, सांसद प्रतिनिधि हरगोविंद रावत, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, सामाजिक कार्यकर्ता डा. ललित जोशी, ग्राम प्रधान नंदी देवी, ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष हिमांशु पांडे आदि ने भूपेंद्र के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
...होनी को कौन टाल सका
चित्रशिला घाट पर अंतिम विदाई देने पहुंचे नायब सूबेदार रमेश चंद्र जोशी ने बताया दिवंगत जवान भूपेंद्र की जेब से जो टिकट मिला था वह गरीब रथ का एसी क्लास का था और उन्हें 4 सितंबर को पहुंचना था, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है।
मौत ने उनका प्लान बदल दिया और वह चार सितंबर के बजाए 31 अगस्त को ही घर के लिए रवाना हो गया। भूपेंद्र की मौत से उनके परिवार के सपने तार-तार होकर बिखर गए। परिजन भूपेंद्र की गृहस्थी बसाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वह सबको रोता बिलखता छोड़ गए।