निर्माणाधीन आईएसबीटी में कब्र मिलने के बाद अब सियासत की दबी परत भी उघड़ने लगी है। बृहस्पतिवार को यहां निरीक्षण करने पहुंचे परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने आईएसबीटी का निर्माण तुरंत रोकने का आदेश देकर इस सियासत को हवा भी दे दी है। हालांकि, आर्य ने खुद ही बात संभालते हुए यह भी कहा है कि आईएसबीटी का निर्माण कार्य बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
हल्द्वानी गौलापार में आईएसबीटी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का ड्रीम प्रोजेक्ट है। करीब 80 करोड़ की इस परियोजना पर इंदिरा हृदयेश ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए खासा काम भी किया था।
अक्टूबर 2016 में इस परियोजना के शिलान्यास में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत से लेकर अन्य कई मंत्री पहुंचे थे, लेकिन उस समय के कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य नहीं पहुंचे थे। शिलान्यास कार्यक्रम में भी जमकर विवाद हुआ था।
अब भाजपा सरकार में परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने परियोजना की फाइल भी तलब की है। बताया जा रहा है कि आर्य इस योजना को कैबिनेट में ले जाए जाने से लेकर इसकी निविदा प्रक्रिया की जानकारी चाह रहे हैं। इस समय इस निर्माण कार्य को नागार्जुन नाम की कंपनी कर रही है।
बृहस्पतिवार को आर्य आईएसबीटी का निरीक्षण करने भी पहुंचे। बताया जा रहा है कि यह निरीक्षण आईएसबीटी की भूमि पर खुदाई के दौरान मिली सालों पुरानी कब्र का मामला सामने आने की वजह से भी था। आर्य ने यहां पहुंचकर यह जता भी दिया।
दूसरी तरफ, आर्य ने साफ-साफ कोई बात न कहकर मामले को सियासी अदावत से भी जोड़ दिया। आर्य ने तुरंत ही निर्माण कार्य कर रही कंपनी को काम रोकने का आदेश भी जारी कर दिया। आर्य का यह भी कहना था कि ऐसा कब्र मिलने के संवेदनशील मामले को देखते हुए किया गया।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आईएसबीटी जरूरी है और इसका काम बाधित नहीं होने दिया जाएगा। बहरहाल निर्माण कार्य रुकने से इंदिरा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरे होने पर भी संशय है। इंदिरा हृदयेश ने भी अभी तक इस मसले पर अभी चुप्पी साधी हुई है।