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अभ्युदय, उन्नति, धन वृद्धि कारक है धन त्रयोदशी

Fri, 28 Oct 2016 01:39 AM IST
कैलाश्ा पाठक
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रुपया - फोटो : demo pic
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कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी का नाम धन त्रयोदशी या धनतेरस है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक पांच दिन पर्यंत दीपावली महोत्सव का क्रम बना रहता है। धन त्रयोदशी यमराज से भी संबंध रखती है। इस पर्व पर पूजन, व्रत और दीपदान से सुख, समृद्धि, वैभव, ऐश्वर्य, धन, उन्नति और भाग्य अभ्युदय होता है।
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ज्योतिषियों के मुताबिक इस दिन का संबंध यमराज से होने के कारण घर से बाहर मुख्य दरवाजे पर यमराज के निमित्त दीपदान करना चाहिए। रात में दीपक में सरसों का तेल डालकर रोली, चावल, गुड़, फूल, नैवेद्य से दीपक में यम पूजन करने का विधान है।

दीपक प्रदान करते समय इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए- ‘मृत्युना पास हस्तेन, कालेन भार्यया सह, त्रयोदस्यां दीप दानात, सूर्य जह प्रियता मिती।’ जो विधि पूर्वक धन तेरस को यमराज के निमित्त पूजन, दीपदान, व्रत करेंगे, उनकी असामयिक मृत्यु को खतरा कम होगा।
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ज्योतिषियों के मुताबिक इस दिन टूटे फूटे बर्तनों के बदले नए बर्तन खरीदना शुभ माना गया है। यह दरिद्रता को दूर करके संपन्नता प्राप्त करने का द्योतन करता है। इसी दिन धन्वंतरि भगवान का प्रकाट्य हुआ है।

ज्योतिषी और सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डा. गोपाल दत्त त्रिपाठी के मुताबिक शरीर के रोगादि को दूर करने के लिए भी इसका पूजन और प्रार्थना की जानी चाहिए। लक्ष्मी धन देने वाली है और धन तेरस आरोग्य देने वाला।

धन का तभी सदुपयोग होगा, जब व्यक्ति स्वस्थ होगा। इसी क्रम में स्नान करके प्रदोष काल (सायंकाल) में घाट, बावड़ी, गौशाला, कुंआ, मंदिर आदि में दीपक जलाना चाहिए। धन तेरस को यमुना स्नान का भी विशेष महत्व है।

ज्योतिषियों के मुताबिक धन तेरस को संध्याकाल में ‘कार्तिकस्य असिते पक्षे, त्रयोदस्यां निशा मुखे, यम दीपं बर्हिदद्यात्, अपमृत्यु विनस्यति’ मंत्र के साथ अवश्य दीप दान करना चाहिए।
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