रेलवे ने बुधवार को भी कब्जेदारों को नोटिस दिया। रेलवे टीम ने इंद्रानगर क्षेत्र में कब्जेदारों के यहां पर नोटिस जारी किया है। नोटिस में लिखा है कि रेलवे पटरी से दोनों तरफ 500 मीटर इलाके में रेलवे की जमीन है। इस पर जो निर्माण हैं, वह पूरी तरह अवैध हैं।
कब्जेदारों को आगाह किया गया है कि वह स्वयं ही कब्जा हटा लें। वर्ना रेलवे कब्जा हटाने के साथ ही कब्जेदारों से जुर्माना भी वसूलेगा। यह नोटिस पूर्वाह्न 11 बजे कब्जेदारों के यहां चस्पा किया गया। नोटिस के चिपकने के बाद इलाके में खलबली मच गई। बताया जाता है कि रेलवे की जमीन पर कब्जे के मामले में चार मार्च को अगली सुनवाई है।
हल्दूचौड़ और लालकुआं सूत्रों के मुताबिक पूूर्वोत्तर रेलवे बरेली के इज्जतनगर मंडल से आई टीम ने हल्द्वानी से लालकुआं तक लगभग डेढ़ सौ से अधिक कच्चे निर्माण ध्वस्त किए। इसके अलावा 100 पक्के निर्मार्णों में नोटिस चस्पा कर शीघ्र स्वयं ही अतिक्रमण नहीं हटाने पर ध्वस्त करने की चेतावनी दी।
बता दें कि रेलवे को हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया गया है कि रेलवे भूमि पर कच्चे-पक्के निर्माण किए गए हैं। किसी व्यक्ति द्वारा अब भी कच्ची भूमि पर पक्का निर्माण किया गया है। साथ ही रेलवे ट्रैक के समीप भूमि पर अनेक लोगों ने निर्माण सामग्री, अन्य सामग्री फैलाई गई है।
खाली भूमि में खेती और बागवानी कर रहे हैं। फलदार पौध भी रोप गए हैं। जिस कारण चालक को कई बार सिग्नलों की समस्या आ जाती है। इस समस्या को हाईकोर्ट ने गंभीरता से संज्ञान में लिया और पूर्वोत्तर रेलवे को रेलवे भूमि पर किसी भी प्रकार से हुए निर्माण हटाए जाने एवं पक्के निर्माणों को ध्वस्त किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
इसी को लेकर पूर्वोत्तर रेलवे ने गुरुवार को आरपीएफ, जीआरपीएफ, रेलवे कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने हल्द्वानी से लालकुआं तक रेलवे की जमीन से सैकड़ों कच्चे, पक्के निर्माण ध्वस्त कर दिए। कई लोगों को दो दिन की मोहलत दी गई कि वह स्वयं ही अपना अतिक्रमण हटा लें।
इस दौरान रेलवे के सीनियर सेक्शन इंचार्ज कार्य केएन पांडे, सीनियर सेक्शन इंचार्ज रेलवे पथ एसके सुमन के अलावा जीआरपी, आरपीएफ के अलावा तमाम जवान थे।