बाघों की संख्या बढ़ने से तेंदुओं के व्यवहार में बदलाव ?
प्देश में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है, राज्य में 2018 में बाघों की संख्या 442 थी जो बढ़कर 560 हो गई। जबकि जंगल का एरिया बढ़ने की जगह कम हुआ है। बाघों की संख्या बढ़ने से तेंदुओं के व्यवहार में बदलाव होने का अंदेशा वनाधिकारियों को है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाघ अपनी एक सीमा बनाता है. इसमें दूसरे बाघ या तेंदुओं की उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं करता है। क्योंकि बाघों की संख्या बढ़ी है, ऐसे में तेंदुओं को जंगल की सीमा छोड़ने की नौबत आ रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
तराई पश्चिम वन प्रभाग डीएफओ प्रकाश आर्य कहते हैं कि जंगल के बाहर झाड़ी, गन्ने के खेत में तेंदुओं की उपस्थिति बढ़ रही है। जहां भी वन जैसे स्थिति मिल रही है, वहां पर तेंदुए की रिपोर्ट हो रहे हैं। उनके प्रभाग में जसपुर, काशीपुर, पीरूमदारा समेत अन्य इलाकों में तीन महीने में 50 से अधिक तेंदुए के आबादी वाले इलाके में आने शिकायत आ चुकी है। यह संख्या तुलनात्मक तौर पर ज्यादा है। इसका एक कारण बाघों बढ़ना( पहले 23 थे अब 53 बाघ हैं) भी हो सकता है। इसके कारण तेंदुए बाहर आ रहे हों। तेंदुओं की सुरक्षा को लेकर भी चुनौती बढ़ी है। आठ महीने में पांच तेंदुओं की मौत रोड पार करते समय वाहन की टक्कर से हो चुकी है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं प्रसन्न पात्रो कहते हैं कि तेंदुओं के व्यवहार में बदलाव को लेकर अभी कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है, यह एक अंदेशा हो सकता है। ऐसे में अधिक और पुष्ट जानकारी के लिए बाघों की संख्या बढ़ने से पड़ने वालों के प्रभावों के अध्ययन के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। वहीं, कॉर्बेट पार्क निदेशक धीरज पांडे से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन पक्ष नहीं मिल सका है।