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UK: NH-309 पर वाहनों का कहर...बदल रहा बाघ-हाथी का व्यवहार, WII के शोध नतीजों से खुलेगा राज, बनेगी नई नीति

Tue, 07 Jul 2026 11:38 AM IST
Heera अजीत प्रताप गोस्वामी

सार

आमडंडा-मोहान के बीच NH-309 पर लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव से वन्यजीवों के व्यवहार पर असर पड़ रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने फरवरी-मार्च में इस मार्ग पर शोध किया था, जिसके डेटा का विश्लेषण अब अंतिम चरण में है।
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हाथी
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विस्तार
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आमडंडा से मोहान के बीच एनएच-309 पर बढ़ते वाहनों के दबाव से वन्यजीवों के व्यवहार में आ रहे बदलावों का जल्द पता लगेगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की ओर से इस मार्ग पर फरवरी से मार्च माह तक किए गए शोध के परिणामों का डेटा विश्लेषण अंतिम चरण में है। परिणामों के बाद वन्यजीवों के व्यवहार में आ रहे बदलावों का अध्ययन कर उनके संरक्षण को लेकर नई नीति बनाई जाएगी।

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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) और रामनगर वन प्रभाग के बीच से होकर गुजरने वाले एनएच-309 पर वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। बीते कुछ वर्षों में बढ़ते पर्यटन के साथ ही इस मार्ग पर लगातार जाम भी लग रहा है। ऐसे में वन्यजीवों के कॉरीडोर में व्यवधान से उनके व्यवहार में बदलाव आने की आशंका है। इसे देखते हुए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने फरवरी से मार्च के बीच आमडंडा से मोहान मार्ग पर विस्तृत शोध किया है। अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वाहनों की आवाजाही से बाघ, हाथी, तेंदुआ समेत अन्य वन्यजीवों के व्यवहार, गतिविधियों और उनके प्राकृतिक आवागमन पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ रहा है।

वाहनों की संख्या, गति, ध्वनि का जुटाया आंकड़ा
रामनगर। शोध में सड़क पर वाहनों की संख्या, उनकी गति, दिन और रात के समय वन्यजीवों की गतिविधियों और उनके सड़क पार करने के पैटर्न का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया गया। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर कैमरा और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद से आंकड़े जुटाए गए हैं। फिलहाल इन आंकड़ों का विश्लेषण कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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रामनगर-मोहान के बीच हैं हाथियों के दो कॉरिडोर
टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन के पूर्व सदस्य एजी अंसारी ने बताया कि एनएच-309 पर रामनगर से मोहान के बीच हाथियों के दो मुख्य कॉरिडोर हैं। इसमें मालानी कोटा कॉरिडोर आमडंडा से रिंगोड़ा बीच जबकि चिल्किया कोटा कॉरिडोर सुंदरखाल पुलिस चौकी से धनगढ़ी गेट के बीच है। इसके साथ ही कोसी नदी पास होने के चलते बाघ भी इस मार्ग को पार कर रामनगर वन प्रभाग से सीटीआर और सीटीआर से रामनगर वन प्रभाग में विचरण करते हैं।

इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही से वन्यजीवों पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर डब्ल्यूआईआई ने शोध किया है। शोध रिपोर्ट में आए अंतिम परिणामों के आधार पर वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।
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- डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर।

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