नैनीताल। बढ़ती आबादी के साथ नगर की प्यास बुझाने की चुनौती बढ़ती जा रही है। नैनीझील का जलस्तर चार वर्षों में सबसे निचले स्तर पर चला गया है। झील को जीवनदान देने वाले वेटलैंड समेत जलस्रोत विलुप्त हो रहे हैं। जल्द योजना नहीं बनाई गई आने वाले दिनों में भीषण पेयजल संकट खड़ा हो सकता है।
1951 में नगर की जनसंख्या 12,350 थी जो अब चार गुना बढ़कर 50 हजार के करीब है। पीक सीजन में यहां रोजाना 40 पर्यटक भी पहुंचते हैं। नैनी झील में स्थापित ट्यूबवेल से शहर को पानी की आपूर्ति की जाती है। वर्ष 2015 तक शहर को 24 घंटे पानी सप्लाई की जाती थी। इसमें प्रतिदिन 16 एमएलडी पानी खर्च होता था। वर्ष 2016 व 2017 में फरवरी में नैनीझील का जलस्तर शून्य होने और गर्मियों में गिरने के बाद तत्कालीन आयुक्त के आदेश पर रोस्टर शुरू हुआ। अब नगर में सुबह-शाम करीब आठ एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। पीक पर्यटन सीजन में यह 10 एमएलडी तक पहुंच जाती है। इससे प्रतिदिन नैनीझील का पानी न्यूनतम आधा इंच से लेकर अधिकतम 1.25 इंच कम होता है। जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी बताते हैं कि पीक पर्यटन सीजन में नैनीताल में पर्यटकों की अनुमानित आवक 30 से 40 हजार रहती है।
कई जलस्रोत सूखे तो कुछ में कम हो गया पानी
इतिहासकार व पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत बतातेे हैं कि सूखाताल, लैड्स एंड से टिफन टाॅप के बीच स्थित तीन से चार वेटलैंड, शेरवुड, कुमाऊं विवि के समीप स्लिपीहाल, शेर का डांडा में वेटलैंड सूख चुके हैं। सिपाही धारा तल्लीताल, चूना धारा मल्लीताल, पर्दाधारा, गौमुख धारा कृष्णापुर, यहीं का तुड़तुड़िया धारा, स्प्रिंग फील्ड, विश्राम घाट पाइंस, गुफा महादेव मंदिर, नारायण नगर, स्टोनले, राजपुरा समेत डेढ़ दर्जन से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत सूखने के कगार पर हैं। यहां वेटलैंड तो खत्म से हो गए हैं।
जगी है जलस्रोतों के जिंदा होने की उम्मीद
हाईकोर्ट के आदेश पर सूखाताल को पुनर्जीवित करने का कार्य चल रहा है। जल संस्थान की ओर से नगर पालिका मद से 11 प्राकृतिक जलस्रोतों को जिंदा करने के लिए धनराशि दे दी गई है। इसका टेंडर भी जारी कर दिया गया है।
30 मार्च को झील का जलस्तर
2025-3.10 फीट
2024-4.1 फीट
2023-4.11 फीट
2022-7 फीट
2021 में 1.9 फीट