हल्द्वानी। सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार के लिए योजनाओं तो खूब बनती हैं, शिक्षकों के प्रशिक्षण और सुविधाएं बढ़ाने के लिए करोड़ों का बजट भी हर वर्ष जारी होती है, लेकिन धरातल हालात किसी से छुपे नहीं है। कुछ ऐसा ही हाल है राजकीय इंटर कॉलेज फूलचौड़ का। अटल उत्कृष्ट योजना के तहत इस विद्यालय का चयन हुआ, सीबीएसई पाठ्यक्रम भी लागू कर दिया गया, लेकिन क्षतिग्रस्त भवन, उखड़ता प्लास्टर, टपकती छत और खिड़कियों के टूटे शीशे इस विद्यालय की दुर्दशा बयां करने के लिए काफी हैं।
प्रदेश सरकार ने बच्चों को निजी स्कूलों की भांति अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रदान करने के लिए अटल उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन किया है। ताकि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल सके। मगर इन स्कूलों की दशा अब भी पुरानी है। इनमें सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू हो गया है, लेकिन सीबीएसई की गाइडलाइन में ये स्कूल फिट नहीं बैठते हैं।
जीआईसी फूलचौड़ वर्ष 2021 में अटल उत्कृष्ट विद्यालय की श्रेणी में आया। वर्तमान में यहां करीब 515 विद्यार्थी पढ़ते हैं। अटल उत्कृष्ट विद्यालय की श्रेणी में आने के बाद यहां अंग्रेजी माध्यम का सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू हो गया है, अब सभी परीक्षाएं सीबीएसई के अनुसार होंगी लेकिन इसके उद्देश्य अब भी पूरे नहीं हो पाए हैं। स्कूल में संसाधनों का अभाव है। शिक्षकों की कमी है।
11वीं और 12वीं कक्षा के कक्षों के फर्श उखड़े पड़े हैं। छत और दीवारों से प्लास्टर गिर रहा है। एक शिक्षण बोर्ड में छेद हो गया है, फिर भी उसे नहीं बदला गया। प्रयोगशाला और हॉल की छत बारिश में टपकती है।
इनसेट
एक सेक्शन में बैठ रहे 97 बच्चे
एक सेक्शन में 97 बच्चे हैं जबकि सीबीएसई गाइडलाइन के अनुसार एक सेक्शन में अधिकतम 45 बच्चे हो सकते हैं। स्कूल प्रशासन के अनुसार सीबीएसई के तहत होने वाले सेक्शन के अनुसार यहां शिक्षकों की कमी है। एक शिक्षक पर दो सेक्शन के बराबर बच्चों का भार है। इससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही शिक्षकों पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
इनसेट
90 प्रतिशत खिड़कियों के शीशे टूटे
स्कूल के तीन मुख्य भवनों में करीब 14 कक्ष हैं। इनकी 90 प्रतिशत खिड़कियों के शीशे टूट पड़े हैं। सर्दियों में इनसे आने वाली ठंडी हवाओं से छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं कक्षों के भीतर लगे बिजली के बोर्ड भी उखड़े हुए हैं। कई कक्षों में पंखा चलाने के लिए प्लग तक नहीं है।
वर्षों से नहीं हुई रंगाई-पुताई
वर्ष 1975 में स्कूल की स्थापना हुई। वर्ष 1979 में इसे इंटरमीडिएट बनाया गया। वर्ष 2021 में अटल उत्कृष्ट विद्यालय की श्रेणी में लाया गया। इसके बाद से यहां अंग्रेजी माध्यम का सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू हो गया है। करीब दस साल से इस स्कूल में रंगाई-पुताई का काम नहीं हुआ है।
कोट
अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू हो गया है। इनमें शिक्षकों और संसाधनों की कमी को दूर करने व मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के विकास के लिए हरसंभव कार्य किए जा रहे हैं।
-केएस रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल।
अटल उत्कृष्ट विद्यालय जीआईसी फूलचौड़ में बिना शीशों के कक्ष की खिड़कियां। विज्ञप्ति