श्री रामलीला कमेटी में लाखों रुपए के गबन के खुलासे की मांग को लेकर कमेटी महामंत्री अमित कबडवाल का आमरण अनशन मंगलवार तीसरे दिन भी जारी रहा। कबडवाल का मेडिकल चेकअप कराने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ ने उसे अनशन से उठाने का प्रयास किया। लेकिन कबडवाल के जिद पर अड़े रहने पर पुलिस और प्रशासन की टीम वापस लौट आई।
श्री रामलीला कमेटी में लाखों रुपए गबन का आरोप लगाते हुए महामंत्री अमित कबडवाल ने रामलीला मैदान स्थित राम भवन में अनशन शुरू किया है। धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों का भी महामंत्री के आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। मंगलवार को कई लोगों ने बाजार क्षेत्र में घूमकर समर्थन मांगा और गबन के खुलासे की मांग की। आमरण अनशन पर बैठे कबडवाल के स्वास्थ्य में गिरावट आने पर सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह ने उसका मेडिकल चेकअप कराया।
चेकअप के बाद उसे अनशन से उठाने का प्रयास किया। इसके बाद सीओ आरएस हयांकी और कोतवाल आरएस मेहता पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने भी उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन कबडवाल ने कहा कि कमेटी की आय का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए तभी वह अनशन तोड़ेगा।
कोट
रामलीला कमेटी का कार्यकाल दो साल का निर्धारित होता है। 31 मार्च को कार्यकाल खत्म हो चुका है। बावजूद इसके कमेटी में घमसान बचा है। महामंत्री के गबन के आरोपों के बाद कमेटी के बैंक खातों से पैसे की निकासी पर रोक लगा दी है। बायलॉज में संरक्षक को कमेटी भंग करने का अधिकार नहीं है। - हरबीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
रिन्यू नहीं हुआ पंजीकरण
श्री रामलीला कमेटी का नियमानुसार हर साल आडिट होता है। आडिट के लिए कमेटी का पंजीकरण का नवीनीकरण जरूरी है। 2010 में नवीनीकरण हुआ था, जो 15 अक्तूबर 2015 को खत्म हो चुका है। पंजीकरण रिन्यू नहीं होने से कमेटी की आय एवं व्यय का आडिट नहीं हो सका है। आडिट नहीं होने से ही गबन के आरोप उजागर हुए हैं।