हाईकोर्ट ने राज्य में राजकीय प्राथमिक विद्वालयों में कार्यरत सहायक अध्यापक प्राथमिकों द्वारा नई नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने पर कडा रूख अपनाते हुए कहा है कि जिन अध्यापकों ने पूर्व से ही प्राथमिक विद्वालयों में अध्यापक पद पर रहने के बावजूद नई नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लिया है उनकी सूची बनाई जाए तथा एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर आवेदकों के खिलाफ सिविल व आपराधिक कार्यवाही की जाए।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे आवेदक जिन्होंने न्यायालय से आदेश प्राप्त कर चयन प्रक्रिया में भाग लिया है उनके विषय में अंतिम निर्णय राज्य सरकार लें। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर पुन: आवेदन करने वालों को हटाकर नई सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। काशीपुर निवासी मुकेश कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड राज्य के प्राथमिक विद्वालयों में सहायक अध्यापक के लिए 1200 पदों के लिए निदेशक प्राथमिक शिक्षा उत्तराखंड ने 17 फरवरी 2016 को विज्ञापन जारी किया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि विज्ञापन के शर्त के अनुसार प्राथमिक विद्वालयों में कार्यरत अध्यापक समान पद होने के कारण नई नियुक्ति प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे। अन्य शर्त के अनुसार अभ्यर्थी का रोजगार कार्यालय में पंजीकरण होना अनिवार्य था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्व से कार्यरत सहायक अध्यापकों द्वारा बिना विभाग की अनुमति लिए तथा रोजगार कार्यालय का पंजीकरण नंबर देकर चयन प्रक्रिया में शामिल हो गए तथा अंतिम चयन सूची में शामिल भी हो गए हैं।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए पुन: आवेदन करने वालों अभ्यर्थियों को हटाकर नई सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं।