सरकार ने उत्तराखंड परिवहन निगम के भवाली डिपो में पिछले दिनों 17 नई बसें तो भेज दी, लेकिन इन बसों को चलाने के लिए न तो डिपो के पास चालक हैं और न पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था। ऐसे में डिपो प्रबंधन पहाड़ की सड़कों पर ये बसें नहीं चला पा रहा है।
इससे डिपो को हर रोज करीब दो लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर पार्किंग की जगह न होने के कारण भवाली डिपो की बसें सड़क किनारे खड़ी हैं। डिपो को अभी 30 चालकों की दरकार है।
भवाली डिपो के पास 22 बसें थीं।
अब 166 व्हील बेस की 17 छोटी बसें (34 सीटर), 205 व्हील बेस की 6 बसें (44 सीटर) और भेज दी। अब डिपो का बस बेड़ा 45 का हो गया, लेकिन इन बसों को चलाने के लिए डिपो के पास चालकों की भारी किल्लत है। अभी डिपो में 55 चालक हैं, जबकि विभिन्न रूटों पर वाहन दौड़ाने के लिए डिपो को 85 चालकों की जरूरत है।
चालक न होने के कारण डिपो की नई और पुरानी बसें यहां भवाली रोड में पेट्रोल पंप के पास, कैंची में सड़क किनारे और नैनीताल में रोडवेज स्टेशन पर खड़ी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि डिपो में रिक्त चालकों के 30 पदों को भर दिया जाए तो डिपो प्रबंधन रूट चार्ट के मुताबिक भवाली-पिथौरागढ़, नैनीताल-गोपेश्वर, हल्द्वानी-भटेलिया और हल्द्वानी-सकूना, हल्द्वानी-पतलोट समेत पहाड़ के कई अन्य रूटों पर निगम की बसों की आवाजाही शुरू कर सकता है, लेकिन चालकों के अभाव में निगम की कई बसें सड़क किनारे धूल फांक रही हैं। इससे निगम को हर रोज दो लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पहाड़ के बंद पड़े रूटों पर बस चलाने का चार्ट बनाया था, लेकिन डिपो में वाहन चालकों की भारी कमी के चलते पहाड़ के रूटों पर बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण बसों को सड़क किनारे अथवा दूसरे स्टेशनों में खड़ा कराना मजबूरी है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है।
-अमरनाथ एआरएम भवाली डिपो