नलकूपों में स्टेबलाइजर न लगने का खामियाजा अभी भी लोगों को भुगतना पड़ रहा है। छड़ायल के ट्यूबवेल की मोटर बृहस्पतिवार को फुुंक गई और तीन हजार से अधिक आबादी को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ा।
गर्मियों से लेकर अभी तक ट्यूबवेल की मोटर फुंकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जल संस्थान के अधिकारी भी स्टेबलाइजर शीघ्र लगने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें समय-समय पर कर चुके हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में स्टेबलाइजर न लगने से आज भी लोग परेशान हो रहे हैं। बृहस्पतिवार को सिंचाई विभाग के नलकूप की मोटर फुंक गई।
छड़ायल में रहने वाले लगभग तीन हजार परिवारों को पेयजल के लिए तरसना पड़ा। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संतोष कुमार उपाध्याय ने बताया कि सिंचाई विभाग का ट्यूबवेल बनवाने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। शुक्रवार से प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर भेजे जाएंगे। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पीके वर्मा ने बताया कि नलकूप की मोटर बनने में लगभग 15 का समय लगेगा।