हल्द्वानी। रिश्वत के दो मामलों में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) ने ऊधमसिंह नगर के सर्वे कानूनगो और टनकपुर के परिवहन कार्यालय के बाबू को तीन-तीन साल कारावास की सजा सुनाई है।
पहले मामले में ऊधमसिंह नगर के शंकर विश्वास ने वर्ष 2017 में 27 नवंबर को सतर्कता अधिष्ठान कार्यालय में शिकायत की थी। शंकर विश्वास का कहना था कि उनकी दादी की मृत्यु के पश्चात उनका नाम काटकर खतौनी में तीन एकड़ जमीन उन तीन भाइयों के नाम दर्ज करने के एवज में सर्वे लेखपाल (प्रभारी कानूनगो) संतोष कुमार श्रीवास्तव ने रिश्वत मांगी। ट्रैप टीम ने नायब तहसीलदार कार्यालय में तैनात संतोष कुमार श्रीवास्वत को 28 नवंबर को ढाई हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। विशेष न्यायाधीश नीलम रात्रा ने सुनवाई करते हुए संतोष कुमार श्रीवास्तव को तीन साल कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया।
तीन साल में किया घोटाला, तीन साल की ही हुई जेल
परिवहन कार्यालय टनकपुर में 2006 से मार्च 2009 तक तत्कालीन प्रवर सहायक (बाबू) कौस्तुभानन्द पंत और संभागीय परिवहन कार्यालय में तैनात कनिष्ठ लिपिक ग्रेट वालिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। उन्होंने स्वार्थपूर्ति के लिए टनकपुर के रहने वाले दलाल गुमान प्रसाद के साथ मिलकर वाहन मालिकों के वाहनों के यात्रीकर और मार्गकर की धनराशि वसूली। फिर उसमें से कम रकम ट्रेजरी चालानों के माध्यम से टनकपुर के भारतीय स्टेट बैंक में जमा की। बाद में परिवहन कार्यालय टनकपुर में ट्रेजरी चालानों की मूल प्रति में धनराशि बढ़ाकर विभाग को आर्थिक क्षति पहुंचाई। इस संबंध में 12 नवंबर 2014 को तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गत मंगलवार को कौस्तुवानन्द पंत को चार धाराओं में तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई। साथ ही सभी धाराओं में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।