नैनीताल। हाईकोर्ट ने स्वामी चिदानंद मुनि के ऋषिकेश में रिजर्व फॉरेस्ट की वीरपुरखुर्द वीरभद्र के निकट 35 बीघा भूमि पर अतिक्रमण कर उस पर निर्माण करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से पूछा है कि चिदानंद मुनि ने अतिक्रमण हटाया है या नहीं।
इससे पहले स्वामी चिदानंद मुनि की ओर से सुशांत सिंह राजपूत वाद की पैरवी करने वाले अधिवक्ता विकास सिंह ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि कोर्ट में उनकी ओर से दायर शपथपत्र को सुना जाए जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तिथि नियत की। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के खिलाफ स्वामी चिदानंद मुनि सुप्रीम कोर्ट गए थे लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी अर्चना शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऋषिकेश के निकट वीरपुरखुर्द वीरभद्र में स्वामी चिदानंद मुनि ने रिजर्व फॉरेस्ट की 35 बीघा भूमि पर कब्जा कर वहां पर 52 कमरे, एक बड़ा हाल और गोशाला का निर्माण कर लिया है।
चिदानंद के रसूखदारों से संबंध होने के कारण वन विभाग व राजस्व विभाग की ओर से इसकी अनदेखी की जा रही हैं। इस संबंध में कई बार प्रशासन व वन विभाग को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन वहां की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जा रही है। याचिकाकर्ता ने भूमि से अतिक्रमण हटाकर यह भूमि सरकार को सौंपने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तिथि नियत की है।