मरीजों को सस्ती दवाएं देने की केंद्र सरकार की योजना को एसटीएच के डॉक्टर ही पलीता लगा रहे हैं। डाक्टरों का मरीज के इलाज के लिए जेनेरिक नहीं ब्रांडेड दवा और इंजेक्शन ही जरूरत होती है। ब्रांडेड दवा न देने पर जेनेरिक मेडिकल स्टोर में कार्यरत कर्मियों को डॉक्टरों ने धमकाने के साथ ही जमकर लताड़ा।
एक मरीज को एनम एक ग्राम का इंजेक्शन लिखा गया। सुशीला तिवारी अस्पताल में मरीज के तीमारदार जेनेरिक मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन लेने पहुंचा। मेडिकल स्टोर से एजीवाई के नाम से जेनेरिक इंजेक्शन दिया गया।
एजीवाई इंजेक्शन की कीमत उक्त ब्रांडेड इंजेक्शन से कम थी। तीमारदार जब इंजेक्शन लेकर पहुंचा तो डॉक्टर भड़क गए। इंजेक्शन और एक अन्य जेनेरिक दवाएं वापस करा दी गईं। कुछ देर बाद डॉक्टर अपने अन्य साथियों के साथ मेडिकल स्टोर पर आ धमका और कहा कि पर्ची पर जो ब्रांडेड इंजेक्शन लिखा वही दो।
जेनेरिक इंजेक्शन किससे पूछकर दिया। इस बात को लेकर मेडिकल स्टोर कर्मियों और डाक्टरों के बीच बहस भी हुई। डॉक्टरों ने मेडिकल स्टोर कर्मियों को खरीखोटी सुनाई और अपनी डाक्टरी न करने को कहा।
इतना बखेड़ा होने के बाद प्राचार्य और एमएस को मौका ही नहीं मिला कि सीसीटीवी फुटेज देख सके या मामले की जानकारी ले सकें। एमएस डॉ. एके पांडे ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है और प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने पुराना और रटारटाया जवाब दिया कि कार्रवाई करेंगे।