हल्द्वानी। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के परिसरों से प्राध्यापकों के लौटने और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से नए प्राध्यापक मिलने के कारण प्रदेश के महाविद्यालयों में तैनात गेस्ट फैकल्टी की नौकरी पर संकट बना हुआ है। स्थायी प्राध्यापकों की तैनाती के कारण महाविद्यालयों से हटाए गए 84 संविदा प्राध्यापकों का भविष्य अधर में है। वे समायोजन के लिए उच्चशिक्षा निदेशालय से लेकर शासन स्तर तक चक्कर काट रहे हैं।
प्रदेश के महाविद्यालयों से अब तक 119 संविदा प्राध्यापक हटाए जा चुके हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने 2014-15 मेें नियुक्त 35 संविदा प्राध्यापकों को कोटद्वार, रुद्रपुर, खटीमा, काशीपुर समेत अन्य महाविद्यालयों में समायोजित कर दिया है जबकि इस अवधि के बाद नियुक्त हुए 84 संविदा प्राध्यापकों का भविष्य अधर में है। संविदा प्राध्यापकों का कहना है कि नौकरी जाने से उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। सरकार ने पूर्व में वेतन में बढ़ोतरी और पद सुरक्षित करने का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी तक वादा पूरा नहीं हुआ। गेस्ट फेकल्टी का कहना है कि एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में स्थानांतरण किया जा रहा है लेकिन वहां भी उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। इस कारण उनका पूरा परिवार परेशानी से जूझ रहा है। संवाद
कोट
प्रभावित संविदा प्राध्यापकों को महाविद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है। वर्ष 2014-15 में नियुक्त 35 गेस्ट फैकल्टी को दूसरे महाविद्यालयों में समायोजित किया जा चुका है। पद रिक्त होने पर अन्य का भी समायोजन वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा।
- प्रो. अंजू अग्रवाल, उच्च शिक्षा निदेशक