रोजा इफ्तार के लिए खरीदारी करते लोग। संवाद
हल्द्वानी। माहे-रमजान का पहला रोजा रमजान की पाकीजगी और रुहानियत के साथ गुजरा। बृहस्पतिवार को पहले रोजे पर शहर की फिजाओं में इबादत का नूर बिखरा रहा। लोगों ने मस्जिदों में नमाज अदा की, वहीं महिलाओं ने घरों में रहकर खुदा की इबादत और कुरान की तिलावत की।
रमजान के पहले दिन कुदरत भी मेहरबान रही। सहरी में बूंदा-बांदी, दिन में हल्की धूप और शाम को ठंडी हवाएं चलने से मौसम खुशनुमा बना रहा जिससे रोजेदारों को काफी राहत मिली। सुबह फज्र की नमाज से लेकर देर रात इशा और तरावीह तक मस्जिदों में नमाजियों का तांता लगा रहा। बुजुर्गों के साथ बच्चों में भी पहला रोजा रखने के लिए जबरदस्त उत्साह देखा गया।
बाजारों में बढ़ी चहल-पहल : बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। खरीदारों में नमाजी भी नजर आए। कोई इफ्तार तो कोई सहरी की तैयारी के लिए सामान खरीद रहा है। खजूर से इफ्तार करने का बड़ा सवाब माना जाता है। इफ्तार के समय चिप्स, पापड़, चने आदि ज्यादा पसंद किए जाते हैं। ऐसे में बाजार में भी कई वैराइटी के खजूर और चिप्स की दुकानें सज गई हैं।
पड़ोसियों तक जरूर पहुंचाएं इफ्तारी का सामान
मस्जिद बंजारान के पेश इमाम मौलाना अब्दुल बासित ने कहा कि इफ्तार से पहले अपने पड़ोसी का हाल जरूर जान लें। इस्लाम में पड़ोसी का हक सबसे ज्यादा है। अपने दस्तरख्वान पर बैठने से पहले पड़ोसियों तक इफ्तार पहुंचाना इंसानियत और सुन्नत है। उन्होंने मशवरा दिया कि इफ्तार से 20 मिनट पहले दस्तरख्वान पर बैठकर परवरदिगार की नेमतों का शुक्र अदा करें और दुआ मांगें क्योंकि इफ्तार के समय मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती है।