प्यारेलाल नंदकिशोर गलबलिया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ सचिव दिगपाल सिंह डंगवाल को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। स्थानीय श्मशान घाट पर अंत्येष्टि की गई। बड़े भाई जसपाल सिंह और तहेरे भाई किशनपाल, महिपाल, चंद्रपाल, राजपाल डंगवाल ने चिता को मुखाग्नि दी।
बृहस्पतिवार की शाम दिगपाल अपनी बुलेट से काशीपुर से रामनगर लौट रहे थे।
हल्दुआ के पास अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे वह सड़क किनारे गड्ढे में गिर गए। उधर से गुजर रहे एक युवक ने सड़क किनारे पड़ी उनकी बुलेट पहचान ली। उसने दिगपाल के मित्रों और परिजनों को फोन से सूचना दी। सूचना पर 108 चिकित्सा वाहन भी मौके पर पहुंचा और बुरी तरह घायल दिगपाल को काशीपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
दिगपाल की पसलियों में कई फ्रैक्चर और सिर पर गंभीर चोट आने की वजह से उपचार के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को करीब एक बजे शव रामनगर पहुंचा। बेटे का शव देख दिगपाल की मां सुशीला, पिता बालम सिंह डंगवाल, बूढ़ी आमा व बहन रेखा के साथ ही मोहल्ले की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। विभिन्न संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदाई दी।
परिजनों के साथ ही मोहल्ले का लाडला, दोस्तों के दिग्गी की मौत का किसी को यकीन नहीं हो रहा। देर रात दिगपाल डंगवाल की मौत की खबर आई तो मोहल्लेवासियों के साथ ही उसके तमाम शुभचिंतको, मित्रों द्वारा थर्टी फस्ट की पार्टी को बीच से ही छोड़ काशीपुर की ओर रूख करने लगे। हर किसी की आंखों से आंसू बह रहे थे।