रुद्रपुर। गदरपुर में एनएच 74 में पट्टे की जमीन को भूमिधरी में ट्रांसफर कर सांठगांठ से अकृषि कराकर करोड़ों रुपये का मुआवजा पाने की हसरत किसान की धरी रह गई। आर्बिट्रेटर ने एनएचआई की ओर से दाखिल वाद में सुनवाई करते हुए जमीन पर अकृषि की बजाए कृषि दर से मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही गड़बड़ी को लेकर अमर उजाला की खबर पर मुहर लग गई है। आर्बिट्रेटर के फैसले के बाद किसान को अकृषि में मिलने वाले तीन करोड़ 15 लाख की बजाय कृषि दर से 33 लाख रुपये का मुआवजा एसएलओ दफ्तर ने खाते में डाल दिया है। अब जमीन पर कब्जा लिया जाएगा। इसी जमीन पर विवाद के चलते गदरपुर बाइपास पर रोड़ा अटका हुआ था।
गदरपुर के गोपालनगर में एक काश्तकार की वर्ग 1(ख) की भूमि एनएच चौड़ीकरण की जद में आ रही थी, लेकिन पहले नोटिफिकेशन में जमीन छूट गई थी। काश्तकार के एक बेटे के नाम पर गांव में ही भूमिधरी की जमीन थी। लिहाजा काश्तकार ने अपनी जमीन और बेटे की जमीन में अदलाबदली करने की मांग की। बाजपुर के तत्कालीन एसडीएम ने 23 जनवरी 2016 को जमीनों की अदला बदली उसी श्रेणी में कर दी थी। पट्टे की जमीन को भूमिधरी में नहीं बदला जा सका था। यही नहीं दो दिन के भीतर ही एसडीएम ने ट्रांसफर की जमीन को लगान से मुक्त करते हुए अकृषि घोषित कर दिया था। एनएच के संशोधित नोटिफिकेशन में यह जमीन शामिल हो गई थी। इसी अकृषि जमीन पर एसएलओ दफ्तर ने करोड़ों रुपये का अवार्ड बनाकर एनएचएआई को मुआवजे के लिए भेज दिया था। इसी बीच एसआईटी की जांच शुरू हो गई और विवादित मामलों की जांच के चलते मुआवजा रुक गया था।
इसके बाद अकृषि घोषित की गई जमीन का आदेश भी निरस्त हो गया था। इस पूरे गोलमाल को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाते हुए 16 और 17 अप्रैल 2018 को पट्टे की जमीन को बना दिया भूमिधरी और ट्रांसफर के दो दिन में बदल दी जमीन की प्रकृति शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इससे प्रशासन में हड़कंप मच गया था। प्रशासन ने डीजीसी से परीक्षण कराया तो इनमें गंभीर अनियमितताएं होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने जमीनों की अदला बदली के निर्णय के खिलाफ कमिश्नर दफ्तर में वाद दायर किया था।
इधर, तत्कालीन एसएलओ ने दोबारा जांच कराकर तीन करोड़ 15 लाख 41 हजार 927 रुपये का अवार्ड एनएचएआई को भेज दिया था। लगातार खबरों से हुई हलचल के बाद पिछले साल भूमि की प्रकृति बदलने का आदेश का हवाला देते हुए एनएचआई ने मुुआवजा रोक दिया था और एसएलओ दफ्तार की ओर से बनाए गए अवार्ड के खिलाफ आर्बिट्रेशन में चली गई थी। आर्बिट्रेटर ने वाद की सुनवाई करते हुए जमीन को अकृषि नहीं बल्कि कृषि मानते हुए इसी दर से मुआवजा देने का आदेश पारित किए हैं।
एनएच 74 के एसएलओ नरेश दुर्गापाल ने कहा कि आर्बिट्रेटर के आदेश पर एनएचएआई ने कृषि दर से मुआवजा जारी किया है। जमीन पर दर्शाए गए सीड प्लांट को भी नहीं माना गया है। पहले कृषि दर पर काश्तकार को 33 लाख रुपये का मुआवजा खाते में डाल दिया है। अब जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई होगी। पूर्व में जमीन पर अकृषि की दर से तीन करोड़ 15 लाख का अवार्ड बनाकर एनएचएआई को भेजा गया था।