तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बैलपड़ाव रेंज में आपसी संघर्ष में एक और नर बाघ की मौत हो गई। बाघ के शव का पोस्टमार्टम कर शव को नष्ट कर दिया गया। वहीं, वन संरक्षक ने भी मौके पर पहुंचकर बाघ के शव का मुआयना किया। बता दें कि पिछले दो माह में दो और बाघों की मौत आपसी संघर्ष में हुई थी।
छोई बीट के बैलपड़ाव रेंज के कंपार्टमेंट बरुवा नंबर एक में गश्त के दौरान एक बाघ के शव को देखा गया जिसकी सूचना रेंजर शेखर तिवारी को दी। उन्होंने इसकी सूचना आला अधिकारियों को दी जिस पर वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते, डीएफओ सुभाष चंद्रा, एसडीओ कलम सिंह ने मौके पर पहुंचकर मृत बाघ के शव का निरीक्षण करते हुए बताया कि उक्त नर बाघ की उम्र लगभग आठ वर्ष है और शव तीन या चार दिन पुराना हैं।
उसके शरीर पर चोटों के निशान से यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि किसी अन्य बाघ से संघर्ष के दौरान यह बाघ घायल हो गया होगा और ज्यादा चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। पशु चिकित्सकों द्वारा शव का पोस्टमार्टम कर शव को मौके पर ही जला दिया गया।
दो माह में तीन बाघों की मौत
दो माह के अंतराल में दो डिविजनों में एक बाघिन का राज कायम है जिसके चलते दस किलोमीटर के दायरे में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर तीन बाघ अपनी जान गंवा बैठे हैं।
वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते बताते है कि क्षेत्र तराई पश्चिमी वन प्रभाग और रामनगर वन प्रभाग की दस किलोमीटर दायरे में एक बाघिन व अनेक बाघ यहां विचरण करते है। इस बाघिन को अपने कब्जे में करने को लेकर इन नर बाघो की आपसी जंग हुई। जिस कारण पहला बाघ 19 जनवरी को रामनगर डिविजन के देचौरी रेंज में आपसी संघर्ष में मृत मिला था।
वहीं, दूूसरा बाघ 16 फरवरी को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बैलपड़ाव रेंज केे छोई के पास मृत मिला था वो भी आपसी संघर्ष में ही मारा गया था। जिसके शरीर में चोट के निशान थे। इसके बाद बुधवार को आपसी संघर्ष में मारे गए तीसरे बाघ को देखकर बाघिन की खोजबीन के लिए भी कैमरा ट्रैप लगाने के साथ गश्त भी बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि उक्त क्षेत्र मे एक बाघिन दोनों प्रभागों के क्षेत्रों में विचरण कर रही है।