भीमताल डायट में कुमाऊंनी संगोष्ठी में बोलते वक्ता। संवाद
भीमताल (नैनीताल)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) भीमताल में बृहस्पतिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी कुमाऊंनी भाषा एवं साहित्य विषय पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने किया।
कुलपति प्रो. बिष्ट ने कहा कि स्थानीय भाषा पर जितना अधिक कार्य होगा, वह देश उतना अधिक विकास की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा का प्रयोग कर विज्ञान और तकनीकी के विकास में हम आगे बढ़ सकते है। मुख्य वक्ता प्रो. देव सिंह पोखरिया ने कहा कि विभिन्न ताम्रपत्रों में कुमाऊंनी भाषा के विकास के उल्लेख प्राप्त हैं। उन्होंने कुमाऊंनी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की वकालत की। आयोजन सचिव डॉ. संजय गुरुरानी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्थानीय भाषाओं को समृद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत संगोष्ठी आयोजित की रही है। प्रो. प्रभा पंत ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा के संबंध में शोध एवं साहित्य लेखन से इसका संरक्षण और संवर्धन किया जा सकता है। प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने कहा कि भाषाई पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से 12वीं तक कुमाऊंनी भाषा को स्थान दिया जाना चाहिए। डीएलएड प्रशिक्षुओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। काव्य गोष्ठी में प्रख्यात लोकगायक दीवान कनवाल ने कुमाऊंनी लोकगीत प्रस्तुत किए। मीडिया प्रभारी डॉ. प्रेम सिंह मावडी ने बताया कि संगोष्ठी का समापन शुक्रवार को होगा। प्राचार्य सुरेश चंद्र आर्य ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संवाद