महाराष्ट्र के शिरडी स्थित श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट और कई अन्य प्रमुख मंदिर समितियों ने दान के रूप में 500 और 1000 के नोट लेने बंद कर दिए हैं, लेकिन नैनीताल और आसपास के बड़े मंदिरों में अभी भी लोग भगवान को पांच सौ और हजार के नोट अर्पित कर मन्नतें मांग रहे हैं। मंदिर प्रबंधन समिति भी इन नोटों को सहर्ष स्वीकार कर रही है। कैंची धाम में भी ये नोट चल रहे हैं।
सरोवर नगरी में नयना देवी मंदिर भक्तों और यहां पहुंचने वाले सैलानियों के बीच आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यही कारण है कि यहां पहुंचने वाले सैलानी बड़ी संख्या में मंदिर में मां नयना देवी की पूजा-अर्चना को आते हैं। मंदिर में पहुंचने वाले कई सैलानी तो वहां रखे दानपात्रों में दान की रकम डाल देते हैं जबकि कई सैलानी मंदिर प्रबंधन को नकद चढ़ावा देते हैं।
नयना देवी मंदिर अमर उदय ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी विनोद जोशी ने बताया ट्रस्ट द्वारा मंदिर में रखे गए दानपात्रों को डेढ़ से दो माह के बीच खोला जाता है। भक्तों द्वारा अभी भी चढ़ावे के रूप में हजार और पांच सौ रुपए के नोट दिए जा रहे हैं।
इसके एवज में ट्रस्ट की ओर से दानदाता को रसीद दी जाती है। उन्होंने बताया चढ़ावे के रूप में मिलने वाली समस्त धनराशि बैंक में जमा कराई जाती है। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कैंची मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
यहां भी रोजाना सैकड़ों सैलानी बाबा नीब करौरी के दर्शन को यहां पहुंचते हैं और चढ़ावा दान में देते हैं। वर्तमान में भी श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे के रूप में हजार और पांच सौ रुपए के नोट दिए जा रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा उक्त नोट स्वीकार किए जा रहे हैं जिन्हें ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराया जा रहा है।