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आगरा डायसिस के बिशप को नहीं मिला शेरवुड स्कूल का कब्जा, टीम रविवार को भी पुलिस बल के साथ कॉलेज पहुंची मगर लौटना पड़ा

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नैनीताल में शेरवुड कालेज के गेट पर रविवार को पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे आगरा डायसिस के चेयरमैन और ? - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू के स्थान पर पीटर इमेन्युअल को शेरवुड के प्रधानाचार्य का कार्यभार दिलाने के लिए आगरा डायसिस के चेयरमैन पीपी हाबिल और उनकी टीम रविवार को भी पुलिस बल के साथ शेरवुड कॉलेज पहुंची लेकिन कॉलेज में प्रवेश न मिलने पर वे लौट गए।
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डायसिस की ओर से रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें आगरा डायसिस के बिशप पीपी हाबिल, सेंट जोसेफ्स के पूर्व प्रधानाचार्य पीटर धीरज इमेन्युअल, एडवाइजर अमित सिंह, पादरी राजीव चंद्र, डॉ. एसपी सिंह, एजूकेशन बोर्ड के सचिव अविनाश भी शामिल हुए। इसमें कहा गया कि अमनदीप संधू को पद से हटाया जा चुका है। डायसिस चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआई) से संचालित होते हैं। यह देश में 27 डायसिस का संचालन करती है, जिसमें लखनऊ भी एक है। वर्ष 1869 में स्थापित शेरवुड विद्यालय पूर्व में लखनऊ डायसिस से संचालित होता था। वर्ष 1976 में आगरा डायसिस बना और शेरवुड का जिम्मा इसे सौंप दिया गया।
वर्ष 2004 में अमनदीप संधू को शेरवुड का प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया। वर्ष 2010 में विजय मंटोडे ने स्वयं को बिशप लखनऊ बताते हुए सोसायटी में पंजीकरण करा लिया, जिस पर हमारे निर्देश पर ही संधू 2011 में हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने कहा डिप्टी रजिस्ट्रार को बिशप कौन होगा यह तय करने का अधिकार नहीं है। बाद में मंटोडे ने वर्ष 2015 में संधू को टर्मिनेट करने का आदेश दिया जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि प्रधानाचार्य को हटाने का अधिकार गवर्निंग बॉडी का है।
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विद्यालय कर्मचारियों से संवाद जरूरी : हाबिल
नैनीताल। पीपी हाबिल ने कहा कि विद्यालय कर्मचारियों से संवाद की जरूरत है और उन्हें बताना है कि आगरा डायसिस कर्मचारियों के हित में कार्य करेगा। किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। हम न्यायालय में अपनी बात रखेंगे। हाबिल ने कहा कि वर्ष 2018 में हमारे कहने पर भी बजट पास नहीं करवाया गया।
मेरे पास अधिकार, हाबिल के पास नहीं : संधू
नैनीताल। शेरवुड के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने कहा कि पूर्व में प्रधानाचार्य के पद का विवाद हाईकोर्ट तक गया था, तब 2014 में कोर्ट ने संधू को ही प्रधानाचार्य माना था और 2016 में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उन्हें इस पद पर कार्य करने और विद्यार्थियों व स्टाफ के हित में कार्य करने को कहा था। उन्होंने सतत इस दिशा में कार्य किया और कोरोना काल में भी विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी। साथ ही कर्मचारियों को इस पूरे दौर में पूरा वेतन दिया और किसी को भी नौकरी से नहीं हटाया। इससे देश भर में विद्यालय की प्रतिष्ठा और भी बढ़ी। संधू ने कहा कि वह तो हाईकोर्ट के आदेश से कार्यरत हैं, लेकिन स्वयं को अध्यक्ष बताने वाले हाबिल के पास कोई अधिकार नहीं है। अध्यक्ष पद के लिए विभिन्न लोगों ने दावा कर रखा है और दावे को लेकर निचली कोर्ट में सुनवाई चल रही है। खास बात यह है कि इसमें हाबिल पार्टी तक नहीं हैं यानी कि उन्होंने तो दावेदारी तक नहीं कर रखी है। ऐसे में हाबिल उन्हें किस हैसियत से हटा सकते हैं। संधू ने कहा कि उन पर 35 करोड़ के घपले का आरोप मनगढ़ंत है क्योंकि स्कूल की कुल 10 करोड़ की फीस आती है जिसमें 6 करोड़ सैलरी और बाकी विद्यार्थियों के भोजन व अन्य मदों में खर्च होता है। ऐसे में इसमें 35 करोड़ के घपले का आरोप ही हास्यास्पद है। संधू ने कहा कि वह समस्त तथ्य हाईकोर्ट के समक्ष रख कर न्याय की गुहार लगाएंगे।
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