रविवार को हो रही प्रांतीय परिषद की बैठक भाजपा के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होगी। उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर मुंह की खाने, इसके बाद कांग्रेस के बागियों को ढोने और अब भीमताल के पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी का जवाब भी भाजपा खोज रही है। गढ़वाल-कुमाऊं के बीच में संतुलन साधने की कोशिश में भाजपा को अगले प्रस्तावित विधानसभा सत्र के लिए नेता प्रतिपक्ष भी खोजना है और यह भी तय करना है कि 2017 के चुनाव में हरीश रावत के सामने क्या रणनीति होगी। सूत्रों की माने तो प्रांतीय बैठक में इन सब बातों से अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ प्रदेश के सारे भाजपा दिग्गज दो-चार होंगे।
यह पहली बार है कि भाजपा ने प्रांतीय परिषद की बैठक के लिए हल्द्वानी को चुना है। अमित शाह गेट-वे ऑफ गढ़वाल यानी हरिद्वार से उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचे और अब गेट-वे ऑफ कुमाऊं हल्द्वानी से उनका यह दौरा पूरा होगा। जाहिर है कि शाह के रडार पर इस बार पूरा उत्तराखंड है। हल्द्वानी में प्रांतीय परिषद की बैठक है। भाजपा का पूरा प्रदेश संगठन यहां पर मौजूद रहेगा। लिहाजा मंथन के लिए शाह के पास पूरा अवसर भी है। यही वजह है कि प्रांतीय बैठक को शाह करीब 14 घंटे का एकमुश्त समय भी दे रहे हैं।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि शाह की मौजूदगी में भाजपा पिछले तीन माह के पार्टी के काम की समीक्षा भी करेगी। पिछले तीन माह में भाजपा कई असहज करने वाले सवालों से कन्नी काटती आई है। राष्ट्रपति शासन और इसके बाद हरीश रावत की वापसी, प्रदेश का अधर में लटका हुआ बजट, कांग्रेस के बागी विधायकों से पहले कन्नी काटना और बाद में उनका पार्टी में शािमल होने जैसे मामले हैं, जिन पर भाजपा दो-टुक बात करने से कतराती रही है। आपसी अंतर्द्वंद्व में उलझी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को तो बना पाई, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का चुनाव अभी तय नहीं कर पाई है। इसी तरह 2017 के चुनाव के लिए भाजपा ने यह भी संकेत नहीं दिया है कि आखिरकार दाव किस पर खेला जाएगा। शाह की उपस्थिति में इन मुद्दों पर भी मंथन होना तय है।