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देवस्थल में अंतरिक्ष वैज्ञानिक के रूप में नजर आई थाई राजकुमारी

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ऐरीज के वैज्ञानिकों के साथ ओखलकांडा के देवस्थल में पहुंची राजकुमारी महाचक्री सिकिनधोर्न। - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री सिरिंधोर्न बृहस्पतिवार को ओखलकांडा ब्लाक के देवस्थल पहुंचीं तो अनुभवी अंतरिक्ष वैज्ञानिक के रूप में नजर आईं। उन्होंने देवस्थल की दूरबीनों से दो घंटे तक न केवल अंतरिक्ष का दीदार किया बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद विभिन्न ग्रहों और तारों के बारे में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से सवाल-जवाब भी किए।
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थाई राजकुमारी शाम साढ़े पांच बजे एरीज की ओर से देवस्थल में स्थापित केंद्र में पहुंचीं। उन्होंने वहां मौजूद 1.3 मीटर की टेलीस्कोप से अंतरिक्ष के नजारों को देखा और 3.6 मीटर टेलीस्कोप से ग्लोबूलर क्लस्टर स्पैक्ट्रम लेने के साथ ही इसका वैज्ञानिक विश्लेषण भी किया। उन्होंने लिक्विट मीटर टेलीस्कोप से भी अंतरिक्ष का अध्ययन किया। बृहस्पतिवार की शाम मौसम पूरी तरह साफ था लिहाजा अंतरिक्ष के नजारे देख थाई राजकुमारी प्रफुल्लित नजर आईं।
एरीज के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे ने बताया कि थाई राजकुमारी ने 3.6 मीटर टेलीस्कोप से सीसी रेगुलर क्लस्टर का स्पैक्ट्रम भी लिया। साथ ही उन्होंने 1.3 मीटर टेलीस्कोप से बीटेलग्यूस तारे को देखा जो ओरायन कांस्टीलेशन में है। उन्होंने बताया कि बीटेलग्यूस तारा ओरायन कांस्टीलेशन का सबसे नजदीक का तारा है जो कि अंतरिक्ष में सीरियर तारे के बाद दूसरे नंबर के सबसे चमकदार तारों में से एक है। डा. पांडे ने बताया कि थाई राजकुमारी महाचक्री विज्ञान, विशेषकर अंतरिक्ष विज्ञान में बेहद रुचि रखती हैं। उनके साथ एरीज के निदेशक दीपांकर बनर्जी, पूर्व निदेशक डा. वहाबउद्दीन, डा. ब्रजेश कुमार समेत थाईलैंड के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का पांच सदस्यीय दल भी मौजूद था।
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एस्ट्रोनोमी के क्षेत्र में एशियाई देशों को हर संभव मदद का भरोसा
नैनीताल। एस्ट्रोनोमी के क्षेत्र में एशियाई देशों के साथ मिलकर काम करने का एक प्रस्ताव वर्तमान में चल रहा है। थाई राजकुमारी के भारत भ्रमण के बाद इस प्रस्ताव को और अधिक बल मिला है। राजकुमारी ने भी इस प्रस्ताव में हर संभव सहयोग का भरोसा भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को दिया है। एरीज के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक डा. शशि भूषण पांडे ने बताया कि एस्ट्रोनोमी के क्षेत्र में एशियाई समूह के देशों भारत, जापान, चीन, कोरिया व इंडोनेशिया के बीच साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव चल रहा है। थाई राजकुमारी ने
इस प्रस्ताव को महत्वपूर्ण बताया है साथ ही हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। थाई राजकुमारी का कहना है कि एशियाई देश ठीक उसी तरह एस्ट्रोनोमी के क्षेत्र में काम कर सकते हैं जैसे यूरोपियन देश चिली में काम कर रहे हैं। डा. पांडे ने बताया कि थाई राजकुमारी महाचक्री ने कहा है कि वह इस कार्य में हर संभव मदद करेंगी।
भीमताल में स्वागत
भीमताल (नैनीताल)। बृहस्पतिवार को थाईलैंड की राजकुमारी कड़ी सुरक्षा के बीच शाम 3.30 बजे भीमताल के कंट्रीन होटल पहुंची। जहां कंट्रीन होटल के जीएम रवि जोशी ने राजकुमारी का स्वागत किया। होटल में राजकुमारी ने 15 मिनट विश्राम किया। विश्राम करने के बाद राजकुमारी अपने दल के साथ देवस्थल को रवाना हुई।
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