फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लावारिस कुत्तों से दहशत: हर साल हजारों लोग हो रहे घायल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी नहीं थमा आतंक

Fri, 18 Sep 2026 02:37 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी

सार

हल्द्वानी में लावारिस कुत्तों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शहर की सड़कों और रिहायशी इलाकों में झुंड के रूप में घूम रहे कुत्ते आए दिन लोगों को काट रहे हैं। हर साल हजारों लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
हीरा नगर में घूमते लावारिस कुत्ते। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हल्द्वानी शहर में लावारिस कुत्ते हर दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं। सड़कों, रिहायशी क्षेत्रों और गलियों में इनका जमावड़ा लग रहा है। कुत्तों के हमले में जख्मी लोग रोजाना अस्पतालों में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाने पहुंच रहे हैं लेकिन सिस्टम जान के दुश्मन बने कुत्तों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। शहर के हीरानगर, जज फार्म, मुखानी, नवाबी रोड आदि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लावारिस कुत्तों के झुंड नजर आते हैं। रात होने पर इनका सड़कों पर राज हो जाता है। पैदल चलने वालों के साथ ही दोपहिया वाहनों के पीछे ये काटने के लिए दौड़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी शहर में न तो कुत्तों का खौफ खत्म हुआ है और न ही इसकी रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

नगर निगम क्षेत्र में 40 हजार लावारिस कुत्ते

नगर निगम के 60 वार्डों में करीब 35-40 हजार लावारिस कुत्ते हैं। पिछले पांच-छह महीनों में शहर के पॉलीशिट, मल्ली बमौरी, गौजाजाली, जज फार्म समेत मुख्य मार्गाें और गलियों में लावारिस कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। स्थिति यह है कि कई बार नगर निगम की टीम को सूचना देने के बावजूद ऐसे कुत्तों का पता नहीं चल पाता है। इससे भी लोगों में भय बना रहता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में एक साल में 10 हजार लोगों को लावारिस कुत्ते काट चुके हैं।

विज्ञापन


डॉग शेल्टर का प्रस्ताव शासन में लंबित

नगर निगम क्षेत्र में ऐसा कोई स्थान नहीं हैं जहां लावारिस कुत्तों को रखा जा सके। केवल कुत्तों के बधियाकरण के लिए जवाहरनगर क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाया गया है। इसी सेंटर परिसर में डॉग शेल्टर बनाने के लिए निगम ने एक करोड़ से अधिक की डीपीआर बनाकर शहरी विकास भेजी है लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जिसके चलते यह प्रस्ताव लटका हुआ है।

एबीसी सेंटर में अपर्याप्त जगह

एबीसी सेंटर इतना छोटा है कि यहां एक बार से चार से पांच कुत्ते ही रखे जा सकते हैं। यदि किसी लावारिस कुत्ते को कोई बीमारी हो और उसे यहां रख दिया तो सेंटर में अन्य किसी कुत्ते को नहीं रखा जा सकता। पिछले दिनों केनोइन डिस्टेंपर से पीड़ित कुत्ते को तीन दिन यहां रखा गया लेकिन तब तक शहर में परेशानी का सबब बने कुत्ते खुलेआम घूमते रहे।

हर साल औसतन होता है 39 सौ कुत्तों का बधियाकरण

नगर निगम में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक शहर में 35 से 40 हजार के करीब लावारिस कुत्ते मौजूद हैं। इनमें से निगम हर साल तीन से चार हजार कुत्तों का बधियाकरण करता है जो कि कुल संख्या के हिसाब से बेहद कम है। नियमानुसार कुल लावारिस कुत्तों में से दस फीसदी को बधियाकरण से मुक्त रखना होता है लेकिन यहां बधियाकरण ही करीब 10 प्रतिशत कुत्तों का हो रहा है।

विज्ञापन


वर्ष 2021 में बना था एबीसी सेंटर

नगर निगम ने वर्ष 2021 में एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की स्थापना की थी। निगम के अधिकारियों के मुताबिक तब से आज तक 23702 स्ट्रीट डाग का बधियाकरण किया जा चुका है।

किस साल में कितने कुत्तों का हुआ बधियाकरण

वर्ष             बधियाकरण

2021             3600

2022             4110

2023             4532

2024             4280

2025             3937

2026             3245

डॉग शेल्टर बनाने के लिए डीपीआर बनाकर शहरी विकास निदेशालय भेजी गई है। धनराशि स्वीकृत होते ही शेल्टर का निर्माण शुरू किया जाएगा। नए शेल्टर में 216 कुत्ते एकसाथ रखे जा सकेंगे। शत प्रतिशत स्ट्रीट डाग का बधियाकरण नहीं किया जा सकता है। इसमें कुल संख्या का दस फीसदी को बधियाकरण से मुक्त रखना होता है। - परितोष वर्मा, नगर आयुक्त

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें