हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के विशेष शिक्षा विभाग की ओर से समावेशी समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि एवं वक्ता कुमाऊं विवि के वाणिज्य विभागाध्यक्ष व डीन प्रो. अतुल जोशी ने कहा कि शिक्षकों को समावेशी समाज के निर्माण में अपनी अहम जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्व का बोध होना और समय के साथ स्वयं को अनुकूलित करना आवश्यक है।
प्रो. जोशी ने विभिन्न उदाहरण देते हुए जीवन के प्रत्येक क्षण को उत्साह से जीते हुए शिक्षक की भूमिका को कक्षा से बाहर भी प्रभावकारी बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विवि के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने समावेशी वातावरण के संदर्भ में सबका साथ सबका विकास नारे का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षक बालक को अच्छी शिक्षा प्रदान कर प्रारंभ से ही समाज को समावेशी बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कहा कि नई शिक्षा नीति में भी हितधारकों को समावेशी समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी होगी। शिक्षा विद्याशाखा के निदेशक प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण ने शिक्षा और तकनीकी के माध्यम से समावेशी शैक्षिक वातावरण निर्माण पर जोर दिया। सहायक प्राध्यापक डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल ने शिक्षा के मौलिक अधिकार एवं समावेशन को केंद्रीकृत करते हुए समाज को समावेशी बनाने में शिक्षक की केंद्रीय भूमिका पर विचार रखे। भावना धोनी ने अतिथियों का स्वागत और निशा राणा ने सभी का आभार जताया। संचालन अंकिता सिंह ने किया। इस मौके पर विवि की निदेशक प्रो. रेनू प्रकाश, सहायक प्राध्यापक डॉ. कल्पना लखेड़ा, डॉ. देवकी सिरोला, डॉ. मनीषा पंत, डॉ. दिनेश कांडपाल, डॉ. राजीव मेहता, विनय रावत, डाॅ. सुरेश मेहता आदि मौजूद रहे। संवाद