रोडवेज कर्मचारी यूनियन और काठगोदाम डिपो प्रबंधन के बीच वार्ता के दौरान जमकर हंगामा हुआ। प्रबंधन के अनुसार वार्ता में बर्खास्त कर्मचारी को लाने पर आपत्ति की गई, तो यूनियन के लोग भड़क उठे। वहीं, यूनियन ने अभद्रता, अनदेखी का आरोप लगाते हुए एआरएम को कार्यालय में बंद करने के साथ मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। बाद में अन्य अधिकारियों ने एआरएम को बाहर निकाला। प्रदर्शनकारियों को बुधवार को दोबारा उच्चस्तरीय वार्ता करने और मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया, तो स्थिति सामान्य हो पाई।
रोडवेज कर्मचारी यूनियन की विभिन्न मांगों को लेकर एक वार्ता दोपहर में एआरएम काठगोदाम के साथ थी। बताया जाता है कि वार्ता में पांच कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया था, पर इसमें ज्यादा पहुंच गए। प्रबंधन के अनुसार वार्ता में हाल में बर्खास्त एक कर्मचारी भी शामिल था, जिस पर आपत्ति की गई। इसके बाद मामला बिगड़ गया। प्रतिनिधि मंडल के लोग बाहर निकल आए और नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि चार महीने से लगातार यूनियन की अनदेखी की जा रही है।
बर्खास्त कर्मचारी भी अगर यूनियन का पदाधिकारी है, तो वह कानूनी तौर पर वार्ता कर सकता है। प्रांतीय पदाधिकारी भी अगर डिपो के पदाधिकारी हैं, तो वह भी वार्ता में शामिल हो सकते हैं। इसी बीच अन्य कर्मचारियों को खबर मिली, तो वह भी मौके पर पहुंच गए। बाद में आक्रोशित कर्मचारियों ने एआरएम काठगोदाम पवन मेहरा को बंधक बना लिया। कार्यालय पर ताला भी ठोंक दिया। इस अव्यवस्था के चलते जेएनआरयूएम, सामान्य रोडवेज की करीब 20 बसें फंस गई।
इस बीच बंधक बनाने की सूचना अन्य अधिकारियों को मिली, तो उन्होंने एआरएम पवन मेहरा को बाहर निकाला। बाद में एआरएम वित्त सुरेंद्र बिष्ट समेत अन्य अधिकारियों ने आरएम तकनीकी लेखराज एवं अन्य अधिकारियों के साथ बुधवार को वार्ता कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद शाम 6:30 बजे स्थिति सामान्य हो पाई। इस दौरान प्रांतीय अध्यक्ष एचआर बहुगुणा, मो. जमील खां, कमल पपनै, शमीम अहमद, आनंद बिष्ट, कौशल जोशी, सूरज कुमार, केके यादव आदि थे।a