इस साल अभी तक बारिश नहीं होने से नदियों का जलस्तर गिरता जा रहा है। जल्द ही बारिश नहीं हुई तो इस बार पेयजल की जबरदस्त किल्लत हो सकती है। गौला नदी का जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। पिछले पांच साल में आज के दिन गौला का जलस्तर सबसे कम दर्ज किया गया।
साल दर साल गिरते जलस्तर की प्रमुख वजह जंगलों का कटान, अंधाधुंध निर्माण और बारिश का नहीं होना बताया जा रहा है। पर्यावरणविद् भी गिरते जलस्तर को चिंता का विषय बता रहे हैं। गौला नदी का जलस्तर पांच साल पहले आज के दिन 2014 में 158 क्यूसेक दर्ज किया गया था, जबकि इस वर्ष यह 108 क्यूसेक रहा। पिछले पांच साल की तुलना में गौला के जलस्तर में 50 क्यूसेक की गिरावट दर्ज की गई है। गौला के गिरते जलस्तर को देखते हुए इस साल शहरवासियों को और अधिक पेयजल किल्लत झेलनी पड़ सकती है।
पांच फरवरी को गौला का जलस्तर
2014 158 क्यूसेक
2015 165 क्यूसेक
2016 118 क्यूसेक
2017 120 क्यूसेक
2018 108 क्यूसेक
गौला ही नहीं अन्य नदियों और झीलों का जलस्तर भी गिर रहा है। सूखाताल समेत तमाम झीलों का जलस्तर भी गिर गया है। गिरते जलस्तर की वजह अंधाधुंध निर्माण, जंगलों का कम होना, जनसंख्या और बारिश नहीं होना है। अंधाधुंध निर्माण की वजह से भूजल स्तर में भी गिरावट आ रही है। यह भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
- प्रो. अजय रावत, पर्यावरणविद्।