देश में स्वाइन फ्लू की सक्रियता के बाद ठंडे पहाड़ी क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। बता दें कि हर बीमारी की रोकथाम के लिए उपयुक्त माने जाने वाले ठंडे व पहाड़ी क्षेत्र में यदि किसी माध्यम से स्वाइन फ्लू प्रवेश कर गया तो ज्यादा प्रभावी और सक्रिय रहता है। नगर में अधिकांश बोर्डिंग स्कूल है, जिनमें मैदानी क्षेत्रों के बच्चे पढ़ने आते हैं। फरवरी अंतिम सप्ताह व मार्च पहले पखवाड़े में उन्हें भी खुलना है। ऐसे में क्षेत्र की संवेदनशीलता और भी बढ़ जाती है।
स्वाइन फ्लू के संबंध में पड़ताल में बीडी पांडे अस्पताल के डा. एमएस दुग्ताल ने बताया कि जहां सभी वायरस जाड़े में मर जाते हैं और गर्मी में पनपते हैं, ये उल्टा गर्मी में मरता है। विशेष बात यह है कि इसके लिए 10 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान सबसे उपयुक्त होता है, जिसमें और भी सक्रिय हो जाता है। इसके मृत होने के लिए इससे ऊपर के तापमान की जरूरत होती है। इसलिए ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन समेत आमजन को ज्यादा एहतियात बरतनी होगी।
- बाहर से आने वाले सभी छात्रों से रिपोर्टिंग दिवस पर चिकित्सा प्रमाण पत्र प्राप्त कर या प्रबंधन की ओर से निजी स्तर पर उनकी आवश्यक पड़ताल कर भविष्य की सुरक्षात्मक पहल की जा सकती है। - डा. एमएस दुग्ताल
स्वाइन फ्लू के लक्ष्ण
तेज बुखार, खांसी, जुकाम, नाक बहना, गले में दर्द, पसीना अधिक आना, रक्तचाप का कम होना, उल्टी या पेचिस होना आदि स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। हालांकि अन्य वायरस में भी सर्दी, जुकाम और बुखार के लक्षण होते हैं, लेकिन यदि तीन दिन तक कम होने की बजाय मरज बढ़े तो डाक्अर की सलाह लें।
बचाव को क्या करें
वायरस ग्रसित से कम से कम एक मीटर दूर रहें, हाथ कतई न मिलाएं, साबुन से हाथ धोएं, गर्म पानी खूब पीएं। गर्म पानी पीने से संबंधित वायरस अमाशय में जाकर वहां मर जाता है और निष्प्रयोज्य खाद्य पदार्थ के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है।
मंडल में अलर्ट जारी
नैनीताल। कुमाऊं मंडल के प्रभारी निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. एलएम उप्रेती ने बताया कि सभी जिलों को अलर्ट जारी कर वहां आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दे दिए गए हैं। सभी स्थानों पर टेमीफ्लू दवा समेत आवश्यक किट पहुंचा दी गई है।
क्या कहते हैं स्कूल प्रबंधन
नैनीताल। नगर में अधिकांश बोर्डिंग स्कूल हैं, जिन्हें शीघ्र खुलना है। इसी कारण इस संबंध में स्कूल के इंतजाम जानने बाबत अमर उजाला ने स्कूल प्रबंधन से बातचीत की।
- बिड़ला विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा ने बताया कि उनके स्कूल में 755 बोर्डिंग बच्चे हैं। 8 मार्च को रिपोर्टिंग व 9 को स्कूल खुलना है। उन्होंने बताया कि बीते दिनों स्कूल के हाईस्कूल व इंटरमीडिए के विद्यार्थियों का लखनऊ में विंटर कोचिंग कैंप लगा। इस दौरान बच्चों के बाहर निकलने पर पाबंदी थी। आवश्यक होने पर उन्हें मास्क के साथ शहर में ले जाया गया। 8 मार्च को रिपोर्टिंग के मौके पर विद्यार्थियों से चिकित्सा प्रमाण पत्र लिया जाएगा।
- शेरवुड के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने कहा कि उनके विद्यालय में पूर्व से ही रिर्पोटिंग के मौके पर चिकित्सा प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का नियम है। अभिभावकों से अपील है कि वह सर्दी, जुकाम, बुखार पर विद्यार्थी को स्कूल न भेजें। स्वस्थ होने पर न केवल उसे प्रवेश दिया जाएगा वरन छूटे कोर्स में भी मदद की जाएगी। शेरवुड में 730 बोर्डर हैं। आल सेंट्स की प्रधानाचार्य किरन जरमाया का कहना है कि उनके विद्यालय में भी पूर्व से आवेदन के साथ चिकित्सा प्रमाण पत्र लाने का नियम है। स्वाइन फ्लू के मद्देनजर प्रवेश के दौरान और एहतियात बरता जाएगा।
- सेंट जोसेफ के प्रधानाचार्य पीटर इमेनुअल का कहना है कि इस वर्ष बोर्डिंग में रिपोर्टिंग के लिए आवेदन के साथ चिकित्सा प्रमाण पत्र लाने का नियम लागू किया गया है। बावजूद इसके कोई छात्र बीमार पाया गया तो अभिभावकों से अपील की जाएगी कि वह स्वस्थ होने पर ही बच्चे को स्कूल भेजें।
- अम्तुल्स के प्रधानाचार्य आरएन ठाकुर ने कहा कि उनके विद्यालय में 125 बच्चे छात्रावास में रहते हैं। संबंधित छात्रों के विद्यालय में प्रवेश पर चिकित्सा प्रमाण पत्र लिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो निजी स्तर पर भी चिकित्सक के माध्यम से आवश्यक पड़ताल की जाएगी।
- जिलाधिकारी स्तर से सभी स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी किए जाएंगे कि वह अभिभावकों से संपर्क करें। अपील करें कि स्वाइन फ्लू अथवा किसी बीमारी से ग्रसित होने बच्चों को विद्यालय न भेजें। विद्यालय प्रबंधन निजी स्तर पर भी चिकित्सक से सभी छात्रावासी विद्यार्थियों का प्राथमिक परीक्षण कराएं - दीपक रावत, डीएम