हाइकोर्ट ने देहरादून के बहुचर्चित राजेश सूरी हत्याकांड के जांच अधिकारी को 15 मई को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी रीता सूरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने भाई राजेश सुरी की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की थी।
याचिका में कहा था कि उसके भाई राजेश सूरी की 30 नवंबर 2014 को हाइकोर्ट नैनीताल से देहरादून लौटते समय संदिग्ध मौत हो गई थी। याचिका में कहा कि अधिवक्ता राजेश सूरी ने देहरादून के चर्चित भूमि घोटालों का खुलासा किया था जिनमें सात सौ बीघा भूमि दौलत राम ट्रस्ट, बलवीर रोड देहरादून घोटाला, बीस करोड़ रुपये का स्टांप घोटाला, आवासीय भूमि घोटाला व अन्य मुख्य है।
एक घोटाले के संबंध में अधिवक्ता सूरी ने वर्ष 2002 में एडीएम देहरादून के समक्ष गुप्त बयान दर्ज कराए थे। बाद में इन घोटालों के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद जब सूरी नैनीताल से देहरादून लौट रहे थे तो उनकी मौत हो गई।
डाक्टरों ने पोस्टमार्टम करने के बाद मौत का कारण हार्ट अटैक बताया था। रीता सूरी का आरोप है कि राजेश सूरी को जहर देकर मारा गया।