वैसे तो ओखलकांडा के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। लेकिन ओखलकांडा विकासखंड के दूरस्थ गांव कुंडल में 8 साल पहले जूनियर हाईस्कूल बनाया गया। जो तब से अब तक एक शिक्षक के सहारे है। यहां पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित होने के कारण नये सत्र में एक भी प्रवेश नहीं हो पाया और अभिभावक अपने बच्चों का नाम कटवाकर दूसरे स्कूलों में भेज रहे हैं। जबकि अन्य स्कूलों में जाने के लिए यहां से सड़क भी नहीं है और बच्चे नदियों और गधेरों से होकर 3 से 9 किलोमीटर दूर पैदल जाने को विवश हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार मांग करने के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं की। जिसके चलते ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्राम प्रधान मोहन सिंह चौहान का कहना है कि वह लोग विधायक दानसिंह भंडारी, जिलाधिकारी, शिक्षा विभाग से संबंधित उच्च अधिकारियों को लिखित व मौखिक कई बार सूचित कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अपर निदेशक माध्यमिक सुषमा सिंह बार-बार बयान दे रही है कि शिक्षक पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं होगी तो कैसे पढ़ाई का माहौल बेहतर बन सकता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि महानिदेशक डी सैंथिल पांडियन तक ग्रामीण समस्या पहुंचा चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
ओखलकांडा विकासखंड में शिक्षकों की भारी कमी है। शिक्षक व प्रभारी प्रधानाध्यापक दीवान पनेरू का कहना है कि वह स्वयं शिक्षक हैं लेकिन क्लर्क और चौकीदार का काम भी स्वयं ही करना पड़ता है। स्कूल के लिए न्यूनतम 3 शिक्षकों व एक चौकीदार की सख्त आवश्यकता है। लगभग 15 स े20 लाख का नया भवन शिक्षक नहीं होने के कारण सूना पड़ा है। शुरू में 29 बच्चों ने यहां प्रवेश लिया। आज शिक्षक नहीं होने के चलते छात्र संख्या घटकर नौ रह गयी है। जिला पंचायत सदस्य कृष्णानंद कांडपाल का कहना है कि सर्व शिक्षा अभियान का नारा यहां बेमानी है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर 15 दिन के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती है तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।