हल्द्वानी। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार ने सुनील हत्याकांड में चालक समेत चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के अनुसार बदायूं जिले के देवकी दातागंज निवासी सुनील (28) अपने परिवार के साथ राजपुरा में रहता था। सात अप्रैल 2014 को परिचितों ने उसे फोन कर मजदूरी करने के लिए लालकुआं बुलाया। इसके बाद वह घर नहीं लौटा। काफी ढूंढने के बाद सुनील के पिता रामभरोसे ने इस मामले में कोतवाली थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शक जताया कि किच्छा भंगा निवासी अशोक कश्यप और बृजेश कश्यप ने उसके बेटे को बुलाकर गायब किया है। इस मामले में पुलिस ने धारा 363 के तहत अपहरण का मुकदमा दर्ज किया क्योंकि अशोक कश्यप के रिश्तेदारों से उसकी रंजिश चल रही थी। अशोक कश्यप के रिश्तेदार राधेश्याम की 2009 में हत्या हुई थी। इस घटना में रामभरोसे और उसका बेटा सुनील दोनों अभियुक्त थे, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए थे।
पुलिस ने इस मामले में 13 जुलाई 2014 को आरोपी अशोक कश्यप और उसके भाई बृजेश कश्यप को तीनपानी से गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने पूछताछ में बताया कि रिश्तेदार का बदला लेने के लिए उन्होंने सुनील को बुलाया था। चाकू से हत्या करने के बाद बोलेरो से उसके शव को गड़प्पू जंगल में फेंक दिया था।
बोलेरो ऊधमसिंह नगर जिले के मटिया नानकमत्ता निवासी जगतार उर्फ छेरी सिंह चला रहा था। साथ में उसका भांजा मुनींद्र कश्यप बैठा था, जो बदायूं जिले के अग्रेसी आलापुर निवासी है लेकिन वर्तमान में वह सिरौली किच्छा में रहता है। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया। घटना में प्रयुक्त बोलेरो बरामद कर अभियुक्तों की निशानदेही पर गड़प्पू जंगल से सुनील के शव को बरामद कर लिया था। शव के पास सुनील का मोबाइल भी मिल गया था।
साक्ष्यों की कड़ी जुड़नेे से हुई सजा
एडीजीसी नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि साक्ष्यों की कड़ी जुड़ने से अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सात साल बाद मिली है। अभियुक्तों ने मजदूर सुनील को बुलाया तो उसका सीडीआर साक्ष्य के तौर पर अदालत में पेश किया गया। जिस ढाबे से सुनील को लेकर हत्यारोपी गए थे उसके कर्मचारियों को गवाह बनाया गया। तत्कालीन लालकुआं प्रभारी निरीक्षक ने भी बयान दिया। शव के पास से बरामद मोबाइल ने भी हत्यारों का राज खोल दिया। सुनील के पिता ने गड़प्पू जंगल में जाकर बेटेे के शव की शिनाख्त की थी। इसी कारण हत्यारों को बचने का कोई रास्ता नहीं मिल सका।