मंत्री, संतरी से लेकर शासन का कई साल तक दरवाजा खटखटाने के बाद आखिर में यह बात समझ में आई कि स्टेबलाइजर लगाकर नलकूप की मोटरों को फुंकने से बच सकता है और कुमाऊं के बड़े शहर को पेयजल किल्लत से निजात मिल सकती है। लेकिन जब लगने का मौका आया तो लालफीता शाही ने अपनी ताकत दिखा दी और रास्ता इतना लंबा बना दिया कि यह गर्मी तो बिना स्टेबलाइजर के कट ही जाएगी।
नगर निगम क्षेत्र के 16 नलकूपों में लगने वाले स्टेबलाइजर के लिए शासन ने टोकन मनी के रूप में महज 10 लाख 80 हजार रुपए दिए हैं। टेंडर की प्रक्रिया में एक माह लगेगा और स्टेबलाइजर की खरीद भी मुख्यालय स्तर से ही होगी।
पिछले वर्ष भी एक के बाद एक ट्यूबवेल की मोटरें फुंकी थी। जून में गैरसैंण में हुए विधानसभा सत्र में मामला गूंजने पर विभागों से स्टेबलाइजर के लिए इस्टीमेट मांगे गए थे। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों मेें स्टेबलाइजर लगने मेें दो करोड़ 86 लाख रुपए खर्च होने थे। नौ माह बाद शासन ने राशि तो स्वीकृत की वो भी आधी। नगर निगम क्षेत्र के 16 ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर के लिए महज एक करोड़ 84 लाख 80 हजार रुपए की राशि स्वीकृत हुई।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने बताया कि टोकन मनी के रूप में 10 लाख 80 हजार रुपए मिले हैं। स्टेबलाइजर के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर होने में लगभग एक माह का समय लगेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्टेबलाइजर की खरीद शुरू होगी, इसके बाद निगम क्षेत्र के 16 ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर लगाए जाएंगे। गुप्ता ने साफ कहा कि बारिश शुरू होने से पहले स्टेबलाइजर लगने का काम पूरा हो जाएगा।
अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा के साथ बुधवार को बैठक होगी, जिसमें स्टेबलाइजर की धनराशि अवमुक्त करने और सिंचाई विभाग के नलकूपों के लिए भी तत्काल बजट देने का आदेश दिया जाएगा। -डा. इंदिरा हृदयेश, वित्त मंत्री