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रैगिंग से पीड़ित छात्र ने छोड़ी सीट

Wed, 17 Aug 2016 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
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 तीन माह से चल रहे रैगिंग के मामले में आज नया मोड़ आ गया। रैगिंग से पीड़ित छात्र ने पीजी की सीट छोड़ दी और मेडिकल कालेज प्रशासन पर पक्ष न सुनने का आरोप लगाया। जबकि एंटी रैगिंग कमेटी ने रैगिंग मानने से इंकार कर दिया और किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की बात कही।
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पीजी जेआर वन डा. अजीम इलियास ने अपने वरिष्ठों पर रैगिंग का आरोप लगाया था। मेडिकल कालेज प्रशासन के कार्रवाई न करने पर यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी से गुहार लगाई थी। यूजीसी तक मामला पहुंचने पर मेडिकल कालेज प्रशासन हरकत में आया और एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक बुलाई।

दो बार की बैठक भी बेनतीजा रही थी। पीड़ित छात्र ने डीएम और प्राचार्य को दोबारा शिकायत भेजी थी और कार्रवाई से संतुष्ट न होने की बात कही थी।
मंगलवार को एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक फिर बुलाई गई।

पीड़ित डा. अजीम ने आरोप लगाया कि एमसीआई के मानकों के अनुसार रैगिंग करने वाले से बेगुनाह होने के साक्ष्य मांगे जाते हैं, जबकि मेडिकल कालेज प्रशासन आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। रैगिंग होने संबंधी सारे साक्ष्य मुझसे ही मांगे जा रहे हैं।
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अजीम ने बताया कि मेरे पास उपलब्ध साक्ष्य कमेटी के लोग सुनने को तैयार नहीं है। अजीम ने कहा कि उन्होंने सीट छोड़ दी है और लिखित में प्राचार्य कार्यालय में रिसीव करा दिया है।

प्राचार्य डा. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि अजीम से कहा गया कि परीक्षा के दौरान परीक्षक को बाहर से बुला लिया जाएगा। भविष्य को देखते हुए अजीम को ज्वाइन करने को कहा गया, मगर उन्होंने नहीं माना। कहा कि रैगिंग का मामला नहीं बनता है, यूजीसी की एंटी रैगिंग सेल को इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है।

अजीम से कहा गया कि किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से मामले की जांच करा लें। जिला स्तरीय एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में एसडीएम पंकज उपाध्याय, सीओ राजेंद्र सिंह ह्यांकी, डा. आरजी नौटियाल, डा. विनीता रावत आदि थे।
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