रामनगर। एआई के उपयोग के साथ ही बच्चे अपनी दिमागी क्षमता का भी इस्तेमाल करें। यह बात सीओ सुमित पांडेय ने ग्रेट मिशन स्कूल में हुई पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लाइफ स्टाइल को आसान बना दिया है। इसके चलते बच्चों ने खुद से नई चीजों को खोजना कम कर दिया है जो उनके दिमागी विकास पर प्रभाव डाल सकता है।
शुक्रवार को अमर उजाला की ओर से हिम्मतपुर ब्लॉक ग्रेट मिशन स्कूल में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में सीओ सुमित पांडेय ने कहा कि एआई ने सभी कार्यों को काफी आसान कर दिया है। इसका इस्तेमाल बच्चे तेजी से सीख रहे हैं। वह कम समय में चैट जीपीटी, गूगल जेमिनी आदि की मदद से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा शरीर बहुत एडवांस है। शरीर के जिस अंग का इस्तेमाल नहीं होता है, वह उसका विकास करना बंद कर देता है। ऐसे में पूरी तरह एआई पर निर्भर होने से बच्चों के दिमागी विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बच्चों से एआई के साथ ही खुद के दिमाग की क्षमता को भी बढ़ाने को कहा। इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. नलिनी श्रीवास्तव, गणेश रावत, डॉ. प्रसून श्रीवास्तव, जितेंद्र रमोला, अर्जुन कश्यप, नफीस अहमद, रंजीता कबड़वाल, सुनीता सिंह, वर्षा जोशी समेत छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अपराधियों ने वाॅइस क्लोनिंग को हथियार बनाया
सीओ ने साइबर क्राइम से बचाव के विषय में भी छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बढ़ती जागरूकता के बाद साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए नए पैंतरे अपनाने शुरू कर दिए हैं। अब अपराधी एआई का इस्तेमाल कर वाॅइस क्लोनिंग जैसी तकनीक से घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने रुपयों का लेनदेन बिना पुष्टि के नहीं करने को कहा। साइबर ठगी होने पर 1930 पर कॉल करने को कहा।