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छात्रों ने एमबीपीजी में दिया धरना: छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने दिया आंदोलन को समर्थन, दी चेतावनी

Tue, 29 Oct 2024 12:31 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में छात्रों ने शांतिपूर्वक धरना दिया। उन्होंने शीघ्र मांग पूरी नहीं हो पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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एमबीपीजी में घरेलू सामान के साथ धरने पर बैठे छात्र - फोटो : अमर उजाला
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छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में छात्रों ने शांतिपूर्वक धरना दिया। उन्होंने शीघ्र मांग पूरी नहीं हो पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इस दौरान पूर्व छात्र नेताओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने सरकार के चुनाव न कराने के निर्णय को लोकतंत्र विरोधी बताया।

सोमवार को छात्रनेताओं ने एमबीपीजी कॉलेज के बॉस्केटबाल मैदान में टेंट लगाकर धरना दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। कहा कि लंबे समय से छात्रनेता चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। सरकार, विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की लापरवाही के कारण चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। कहा कि अगर सरकार को चुनाव नहीं कराने थे तो शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले जारी रोस्टर में चुनाव की तिथी क्यों घोषित की गई है। चुनाव न कराने का निर्णय छात्र विरोधी है। अगर छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए तो आंदोलन उग्र किया जाएगा। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष जगमोहन बगड़वाल, पूर्व उपाध्यक्ष एनडी तिवारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीपक शाह, पूर्व छात्रसंघ सचिव योगेंद्र सिंह आदि ने कहा कि सरकार का यह निर्णय जनविरोधी है इसका हर हाल में विरोध किया जाएगा। धरने पर हर्ष शर्मा, चंदन सिंह, अजय कुमार, हर्षित भारती, उमाशंकर, विशाल भोजक, मनोज सिंह बिष्ट, ललित सिंह, राहुल पांडे आदि रहे।

कपड़े, बर्तन और अन्य सामान लाकर धरने में बैठे अध्यक्ष प्रत्याशी

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एमबीपीजी कॉलेज में एनएसयूआई से छात्रसंघ अध्यक्ष पद के दावेदार रक्षित बिष्ट कपड़े, बर्तन और अन्य सामान लाकर कॉलेज परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने उनकी छवि को धूमिल कर दिया है। वह वर्तमान में किराये पर कमरा लेकर रह रहे थे लेकिन मकान मालिक ने घर खाली करा दिया है। अब वो बेघर हो गए हैं, इसके लिए महाविद्यालय प्रशासन और पुलिस जिम्मेदार है। कहा, छात्र-छात्राओं के जमा रुपयों से चुनाव लड़ रहे थे। सरकार का चुनाव न कराने का निर्णय छात्र विरोधी है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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