नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर की ओर से डीएसबी परिसर के जंतु विज्ञान विभाग में स्थित बायो-फ्लॉक फिश टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेंटर का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीसीएफआर भीमताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेश चंद्रा ने कहा कि ट्रॉउट, स्नो ट्रॉउट और महाशीर जैसी प्रजातियां स्वरोजगार के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। प्रो. हरीश चंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बायो-फ्लॉक तकनीक एक आधुनिक पद्धति है जिसमें कम पानी और सीमित स्थान पर टैंकों के माध्यम से मछली उत्पादन किया जा सकता है। सेंटर के निदेशक प्रो. आशीष तिवारी ने छात्रों को फील्ड एक्सपोजर के महत्व की जानकारी दी। डॉ. सीता देवाली और डॉ. दीपक ने विद्यार्थियों को फिश टैंकों का निरीक्षण कराया और मछलियों के आहार व रखरखाव की जानकारी दी। इस मौके पर प्रो. आशीष तिवारी, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. दीपिका गोस्वामी, प्रो. हरीप्रिया पाठक, प्रो. लज्जा भट्ट, प्रो. रीना सिंह, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. हिमांशु लोहमी आदि मौजूद रहे।