अमर उजाला के ‘बेटियों के स्कूल’ अभियान का असर दिखने लगा है। स्कूलों की बदहाली को गंभीरता से लेते हुए डीएम दीपक रावत मंगलवार को अचानक जीजीआईसी नैनीताल पहुंच गए। यहां हर कदम पर खामियां ही खामियां दिखाई दीं।
प्रवेश गेट पर विद्यालय का नाम नहीं था, शौचालय गंदगी से पटे थे, नल टूटे थे तो कई जगह बल्ब भी नहीं थे। अव्यवस्था देख गुस्साए डीएम ने प्रधानाचार्य और प्रबंधन की क्लास लगाई।
हालांक कक्षाओं में जाकर छात्राओं से सवाल पूछने पर डीएम शिक्षण से संतुष्ट नजर आए, लेकिन 11वीं कक्षा में छात्राओं के पास मनोविज्ञान की पुस्तक न होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। कहा एक माह में व्यवस्थाएं सुधार लें अन्यथा वेतन रोक दिया जाएगा।
सुबह 10.30 बजे डीएम जीजीआईसी पहुंचे। कालेज गेट पर सीसी से बने विद्यालय गेट पर स्कूल का नाम ही न होने पर डीएम ने प्रधानाचार्या मंजू पाल से सवाल किया। जिसपर उन्होेंने बजट न होने का हवाला दिया। इसके बाद कई कक्षाओं व गैलरी में कई स्थानों पर बल्ब नहीं थे।
वाटर प्यूरीफायर खराब था। पानी की टंकी से नल गायब थे, जो थे वह भी टूटे हुए। शौचालय का निरीक्षण किया तो वहां भी गंदगी पड़ी थी। वहां डस्टबिन भी नहीं था। पूछताछ में विद्यालय प्रबंधन ने स्वच्छक के छुट्टी पर होने का हवाला दिया।
अव्यवस्थाओं से खफा डीएम ने विद्यालय रमसा व अन्य मद से आने वाली धनराशि की जानकारी प्राप्त की। जिसमें पीटीए मद में 1.90 लाख, रमसा में 49 हजार समेत अन्य एक दर्जन मदों में पर्याप्त धनराशि थी।
इस धनराशि के इस्तेमाल का अधिकार प्रधानाचार्य/प्रबंधन को है। बावजूद इसके विद्यालय की अनियमितताओं पर डीएम ने प्रधानाचार्य व कार्मिकों क्लास लगाई। कहा कि एक माह में व्यस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं तो वेतन रोकने समेत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इससे पूर्व डीएम ने छठी, आठवीं, नवीं कक्षा समेत कंप्यूटर कक्ष का निरीक्षण किया। हालांकि विद्यार्थियों से सवाल जवाब करने पर तो वह संतुष्ट नजर आए। लेकिन 11वीं की छात्राओं के पास मनोविज्ञान की किताब न होने पर उन्होंने शिक्षक को प्रधानाचार्य के माध्यम से सीईओ को पत्र भेजने को कहा।
उन्होंने एनसीईआरटी की इस पुस्तक के बाजार में उपलब्ध न होने पर हैरानी जताई। इसके अलावा विधायक निधि मद से 3 लाख की चाहरदीवारी के बाद विधायक के नाम का बोर्ड परिसर के किनारे पड़े होने पर भी डीएम ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निष्प्रयोज्य सामान की नीलामी को भी कहा।